रायपुर। प्रख्यात हिंदी साहित्यकार और ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित विनोद कुमार शुक्ल का निधन हो गया। उन्होंने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के क्रिटिकल केयर यूनिट अंतिम सांस ली, वे 88 वर्ष थे।

बता दें कि पिछले ही महीने उन्हें हिन्दी साहित्य के सर्वोच्च सम्मान, ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। विनोद कुमार शुक्ल गंभीर श्वसन रोग से पीड़ित थे। 1 जनवरी 1937 को छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में जन्मे विनोद कुमार शुक्ल लगभग नौ दशकों के रचनात्मक जीवन के साथ हिन्दी साहित्य में एक विशिष्ट पहचान रखते थे।

उन्होंने अपनी कविताओं, कहानियों और उपन्यासों में गहरी संवेदनशीलता के साथ जगह दी। उनके लेखन में एक साधारण कमरा, खिड़की, घास का टुकड़ा या पेड़ भी पूरे संसार में बदल जाता है।

1971 में प्रकाशित उनका पहला कविता-संग्रह लगभग जय हिन्द हिन्दी कविता में उनकी अलग भाषिक संरचना, मौन और भीतर तक उतरने वाली संवेदनाओं के आगमन का संकेत था। इसके बाद वह आदमी चला गया नया गरम कोट पहिनकर विचार की तरह, सब कुछ होना बचा रहेगा, अतिरिक्त नहीं, कविता से लंबी कविता, आकाश धरती को खटखटाता है, पचास कविताएँ, कभी के बाद अभी, कवि ने कहा, चुनी हुई कविताएँ और प्रतिनिधि कविताएँ जैसे संग्रहों ने उन्हें समकालीन हिन्दी कविता के सबसे मौलिक स्वरों में स्थापित किया।

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कथा-साहित्य में उनका उपन्यास नौकर की कमीज़ वर्ष 1979 में प्रकाशित हुआ, जिसने हिन्दी उपन्यास की धारा को नया मोड़ दिया। इस उपन्यास पर बाद में मणि कौल ने फ़िल्म भी बनाई। खिलेगा तो देखेंगे, दीवार में एक खिड़की रहती थी, हरी घास की छप्पर वाली झोपड़ी और बौना पहाड़, यासि रासा त और एक चुप्पी जगह के माध्यम से उन्होंने लोककथाओं, स्वप्न, स्मृति और मध्यवर्गीय जीवन को एक अनोखे कथा-शिल्प में ढाला।

उनके कहानी-संग्रह पेड़ पर कमरा, महाविद्यालय, एक कहानी और घोड़ा और अन्य कहानियाँ में घरेलू और सूक्ष्म जीवन के क्षण गहरी कथा-समृद्धि के साथ सामने आते हैं। विनोद कुमार शुक्ल की कई रचनाओं का भारतीय और विदेशी भाषाओं में अनुवाद हुआ है।

अपने लंबे साहित्यिक जीवन में उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार, गजानन माधव मुक्तिबोध फ़ेलोशिप, रज़ा पुरस्कार, शिखर सम्मान, राष्ट्रीय मैथिलीशरण गुप्त सम्मान, दयावती मोदी कवि शेखर सम्मान, हिन्दी गौरव सम्मान, मातृभूमि पुरस्कार, साहित्य अकादमी महत्तर सदस्य सम्मान और वर्ष 2023 का पैन-नाबोकोव पुरस्कार सहित कई बड़े सम्मानों से नवाज़ा गया।

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