बिलासपुर। कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) के बोर्ड ने सर्वाधिक कोयला उत्पादन करने वाली अपनी दो प्रमुख अनुषंगी कंपनी साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) और एमसीएल को स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट करने की सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है।यह फैसला कोयला मंत्रालय के 16 दिसंबर के निर्देश के बाद लिया गया, जिसमें एसईसीएल और महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड (एमसीएल) को अगले वित्तीय वर्ष (2026-27) में लिस्ट करने के लिए कहा गया था।

कोल इंडिया का एक तिहाई से अधिक कोयला उत्पादन

एसईसीएल कोल इंडिया की सबसे उत्पादक अनुषंगी कंपनियों में से एक है। इसका मुख्यालय बिलासपुर में है और यह छत्तीसगढ़ तथा मध्य प्रदेश में बड़े पैमाने पर खनन कार्य संचालित करती है। जिसका सबसे बड़ा हिस्सा कोरबा जिले की खदानें है, जहां से कोल इंडिया के कुल कोयला उत्पादन का करीब 18 फीसदी हिस्सा निकलता है। इसी तरह से इतना ही कोयला उत्पादन की हिस्सेदारी एमसीएल के पास है। जिसका मुख्यालय और खदाने छत्तीसगढ़ से सटे उड़ीसा राज्य में स्थित है।

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गेवरा प्रोजेक्ट एशिया की सबसे बड़ी ओपन कास्ट कोयला खदान

एसईसीएल की बात करें तो वित्तीय वर्ष 2024-25 में कंपनी ने 167 मिलियन टन कोयला उत्पादन किया। एसईसीएल की गेवरा खदान एशिया की सबसे बड़ी ओपनकास्ट कोयला खदान है, जिसका विस्तार और तकनीकी आधुनिकीकरण में कंपनी अग्रणी रही है।

कोल इंडिया के शेयरों में आई तेजी

इस खबर के बाद कोल इंडिया के शेयरों में 3 प्रतिशत तक की तेजी देखी गई और यह 7 महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गए हैं। आज गुरुवार को यह 404 रुपए पर था। विशेषज्ञों का मानना है कि लिस्टिंग से एसईसीएल की वैल्यू अनलॉक होगी, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार को बढ़ावा मिलेगा। छत्तीसगढ़ में हजारों परिवार एसईसीएल से जुड़े हैं और यह लिस्टिंग राज्य के लिए गौरव की बात है।

यह मंजूरी अब कोयला मंत्रालय को भेजी जाएगी, जो इसे निवेश और सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग को आगे बढ़ाएगा। लिस्टिंग विभिन्न नियामकीय मंजूरियों पर निर्भर है। केंद्र सरकार की यह पहल उच्च प्रदर्शन वाली सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में मूल्य अनलॉक करने और पारदर्शिता बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा है।

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