टीआरपी डेस्क।  उत्तर से आ रही ठंडी हवाओं के प्रभाव से छत्तीसगढ़ में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। दुर्ग में शीतलहर का असर बना हुआ है, जहां रात का न्यूनतम तापमान 9.2 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया है। अंबिकापुर, पेंड्रा और रायगढ़ में भी ठिठुरन बढ़ गई है। सुबह और शाम के समय लोग अलाव का सहारा लेने को मजबूर हैं।

मौसम विभाग ने अगले दो दिनों में प्रदेश के कई हिस्सों में न्यूनतम तापमान में लगभग 1 से 2 डिग्री सेल्सियस की और गिरावट के साथ ठंड बढ़ने की संभावना जताई है। कुछ क्षेत्रों में शीतलहर और कोहरे का असर भी देखने को मिल सकता है। विभाग के अनुसार मौसम में किसी बड़े बदलाव की संभावना नहीं है।

पिछले 24 घंटों में प्रदेश का अधिकतम तापमान दुर्ग में 31.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि न्यूनतम तापमान 5.7 डिग्री सेल्सियस अंबिकापुर में रिकॉर्ड हुआ।

कड़ाके की ठंड का असर बच्चों की सेहत पर भी पड़ रहा है। बीते एक महीने में रायपुर के अंबेडकर अस्पताल सहित निजी अस्पतालों में हाइपोथर्मिया के 400 से अधिक मामले सामने आ चुके हैं। बाल एवं शिशु रोग विशेषज्ञों के अनुसार बच्चों का शरीर वयस्कों की तुलना में जल्दी ठंडा हो जाता है। नवजात शिशुओं की मांसपेशियां कम विकसित होने के कारण वे ठंड को सहन नहीं कर पाते। सीजेरियन डिलीवरी से जन्मे शिशुओं में हाइपोथर्मिया का खतरा अधिक रहता है।

See also  Gupt Navratri 2023 : आज से शुरू हुई गुप्त नवरात्रि, मां दूर्गा के इन स्वरूपों की हो रही पूजा, पढ़े इसका महत्व

डॉक्टरों ने बताया कि पर्याप्त सावधानी नहीं बरतने पर बच्चों को एनआईसीयू और एसएनसीयू में भर्ती कर उपचार करना पड़ रहा है। नवजात का शरीर अचानक ठंडा पड़ जाना या तापमान सामान्य से कम हो जाना हाइपोथर्मिया का प्रमुख लक्षण है।

सरगुजा संभाग में भी कड़ाके की ठंड पड़ रही है। दो दिन पहले अंबिकापुर-बनारस मार्ग पर घना कोहरा छाया रहा, जिससे जनजीवन प्रभावित हुआ।