टीआरपी डेस्क। कांग्रेस के भीतर संगठनात्मक मजबूती और आत्ममंथन की बहस अब खुलकर सामने आने लगी है। सोशल मीडिया पर दिग्विजय सिंह के RSS की कार्यप्रणाली पर दिए गए बयान के बाद अब शशि थरूर ने भी बड़ी बात कह दी है।

शशि थरूर ने कहा कि कांग्रेस का 140 साल का लंबा इतिहास है और इतने वर्षों में पार्टी ने बहुत कुछ सीखा है, लेकिन आज भी आत्मनिरीक्षण और अनुशासन की जरूरत बनी हुई है। उनके मुताबिक अनुशासन किसी एक दल की बपौती नहीं है, बल्कि हर राजनीतिक संगठन के लिए जरूरी तत्व है। दिग्विजय सिंह के बयान को लेकर पूछे गए सवाल पर थरूर ने यह भी जोड़ा कि उनके विचारों पर बेहतर जवाब वही दे सकते हैं।
दरअसल, दिग्विजय सिंह ने हाल ही में सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा कर विवाद को जन्म दिया था। उन्होंने लिखा था कि भाजपा और आरएसएस अपने जमीनी कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ने का अवसर देते हैं और वही कार्यकर्ता मुख्यमंत्री व प्रधानमंत्री जैसे शीर्ष पदों तक पहुंचते हैं। इस पोस्ट के साथ उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक पुरानी तस्वीर भी साझा की थी, जिसमें वे वरिष्ठ नेता एलके आडवाणी के पास जमीन पर बैठे नजर आ रहे हैं।
इस बयान के बाद कांग्रेस के भीतर असहजता जरूर दिखी, लेकिन शशि थरूर ने इसे सुधार और संगठन सुदृढ़ी की बहस से जोड़ दिया। उन्होंने दिग्विजय सिंह की उस मांग का समर्थन किया, जिसमें पार्टी के अंदर सुधारों और सत्ता के विकेंद्रीकरण की बात कही गई थी। एक सीनियर नेता द्वारा इस तरह सार्वजनिक मंच पर पार्टी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने से कांग्रेस को असहज स्थिति का सामना करना पड़ा, लेकिन साथ ही यह भी साफ हुआ कि अनुभवी नेताओं के बीच संगठन को लेकर असंतोष और बदलाव की चाह अब दबे स्वर में नहीं रह गई है।


