टीआरपी। New year 2026 : नए साल 2026 का शुभारंभ हिंदू पंचांग के पौष माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि से हो रहा है। त्रयोदशी तिथि को भगवान शिव की पूजा के लिए खास माना जाता है। इस दिन गुरुवार है, जो देवताओं के राजा बृहस्पति का दिन है। इस दिन प्रदोष और गुरुवार होने से गुरु प्रदोष का संयोग बन रहा है। गुरु को ज्ञान, धर्म, समृद्धि, सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। इस दिन रोहिणी नक्षत्र का प्रभाव रहेगा। भगवान शिव की आराधना करना शुभदायी होगा।


नए वर्ष 2026 में गुरु, राहु, केतु ग्रह गोचर करेंगे। गुरु, कर्क राशि में होंगे। राहु मकर राशि में और केतु कर्क राशि में गोचर करेंगे। शनि, मीन राशि में वक्री मार्गी होंगे। 2 जून को गुरु कर्क राशि में पहुंचेंगे। अक्टूबर में सिंह राशि में प्रवेश करेंगे। 25 नवंबर को राहु और केतु गोचर करेंगे। राहु कुंभ राशि से मकर राशि में प्रवेश करेंगे वहीं, केतु का गोचर कर्क राशि में होगा। पूरे वर्ष शनि वक्री मार्गी रहेंगे।

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ऐसे करें शिव पूजन

  • नए वर्ष के पहले दिन गुरु प्रदोष काल में शाम के समय भगवान शिव की पूजा करें। प्रदोष काल सूर्यास्त से लगभग 45 मिनट पहले और 45 मिनट बाद तक माना जाता है। इस दौरान शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र और फल अर्पित करें।
  • ऊं नमः शिवाय मंत्र का जाप करें