टीआरपी। Sirpur : केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने गुरुवार को ऐतिहासिक सिरपुर के पुरातात्विक धरोहर स्थलों का निरीक्षण किया। इस दौरान शेखावत ने कहा कि पुरातत्व स्थलों को संरक्षित और संवर्धित किया जाएगा।
केंद्रीय मंत्री शेखावत ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक स्थल सिरपुर पहुंचे, जहाँ उन्होंने लक्ष्मण देवालय, आनंद प्रभु कुटी विहार, तीवरदेव विहार, सुरंग टीला एवं स्थानीय हाट बाजार का निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि सिरपुर भारत की प्राचीन धरोहर का एक महत्वपूर्ण केंद्र है, जिसे राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की आवश्यकता है।
उन्होंने पर्यटकों की सुविधा के लिए बेहतर सड़क, साइन बोर्ड, सूचना केंद्र, स्वच्छता एवं अन्य मूलभूत सुविधाओं को सुदृढ़ करने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि सिरपुर में कनेक्टिविटी को बढ़ावा दिया जाएगा जिससे पर्यटन में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। सिरपुर को वर्ल्ड हेरिटेज में शामिल करने का प्रयास जारी है। उन्होंने गंधेश्वर मंदिर पहुंचकर गंधेश्वर महादेव की पूजा अर्चना कर देश की समृद्धि की कामना की।
जिला महासमुंद के अंतर्गत स्थित ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक स्थल सिरपुर के दौरे पर उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा एवं प्रदेश के संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल भी उपस्थित रहे। केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री शेखावत का सिरपुर हेलीपैड पर सांसद महासमुंद रूपकुमारी चौधरी, विधायक महासमुंद योगेश्वर राजू सिन्हा, कलेक्टर विनय कुमार लंगेह, पुलिस अधीक्षक प्रभास कुमार एवं, बीज निगम अध्यक्ष चंद्रहास चंद्राकर, पूर्व राज्य मंत्री पूनम चंद्राकर, पूर्व विधायक डॉ विमल चोपडा, जिला पंचायत उपाध्यक्ष भीखम ठाकुर, जनपद अध्यक्ष दिशा दीवान, उपाध्यक्ष हुलसी चंद्राकर, नगर पालिका उपाध्यक्ष देवी चंद राठी आदि मौजूद थे।
उल्लेखनीय है कि सिरपुर प्राचीन नाम श्रीपुर/श्रिपुरा महानदी के तट पर बसी एक प्राचीन नगरी है, जिसका इतिहास 5वीं से 12वीं सदी तक फैला हुआ है। यह दक्षिण कोसल का प्रमुख राजनीतिक, धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र रहा है और यहां हिंदू, बौद्ध व जैन तीनों धर्मों के तीर्थ, मठ, मंदिर और विहारों का दुर्लभ संग्रह मिलता है। खुदाई में यहां 22 शिव मंदिर, 5 विष्णु मंदिर, 10 बुद्ध विहार और 3 जैन विहार के अवशेष मिले हैं।
6 वीं-7वीं सदी का लक्ष्मण मंदिर
लक्ष्मण मंदिर सिरपुर का सबसे प्रसिद्ध और पुरातन हिंदू मंदिर है, जो 6वीं-7वीं सदी में बनाया गया था। यह भगवान विष्णु को समर्पित है और प्रमुख रूप से लाल ईंटों से निर्मित है। रानी वासटादेवी ने इसे अपने पति राजा हर्षगुप्त की स्मृति में बनवाया था इसे एक प्रेम कथा का प्रतीक भी माना जाता है।

तिवरदेव विहार
तिवरदेव विहार एक प्राचीन बौद्ध विहार है, जो 7वीं-8वीं सदी का बताया जाता है। यह बड़े पैमाने पर ईंटों का बना हुआ था और खुदाई में इसका अवशेष मिला है। बौद्ध संप्रदाय से जुड़ा यह विहार सिरपुर में बुद्ध के अनुयायियों द्वारा ध्यान, शिक्षा और धार्मिक क्रियाओं के लिए उपयोग में लाया गया था।
आनंद प्रभु कुटी विहार
आनंद प्रभु कुटी विहार सिरपुर का एक प्रमुख बौद्ध स्थल है, जिसे भिक्षु आनंद प्रभु द्वारा स्थापित किया गया था। यह विहार 14 कमरे वाला एक बड़ा बौद्ध मठ है, जिसमें एक मुख्य प्रवेश द्वार और सुंदर नक्काशीदार स्तंभ पाए गए हैं। यहां बुद्ध की एक विशाल मूर्ति और अन्य बौद्ध प्रतिमाएँ मिलती हैं।
सुरंग टीला
सुरंग टीला सिरपुर का एक अनोखा पुरातात्विक स्थल है, जिसमें प्राचीन काल के मंदिर के अवशेष मिले हैं। यह 7वीं सदी का मंदिर था, जिसमें 5 गर्भगृह पाए गए हैं। इन गर्भगृहों में शिवलिंग और गणेश की प्रतिमा स्थित है, जो इस धार्मिक स्थल की विविधता को दर्शाता है।



