सरगुजा। सरगुजा के संभागायुक्त ने अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में कलेक्टर एमसीबी द्वारा जारी निलंबन आदेश को निरस्त कर दिया है। संभागायुक्त ने लिखा है कि कलेक्टर ने आदेश जारी करने से पहले अपीलार्थी को सुनवाई का अवसर नहीं दिया। प्राकृतिक न्याय सिद्धांत का उल्लंघन किया है। निलंबन आदेश को रद्द करते हुए निलंबन अवधि को कार्यदिवस के रूप में गणना करने का आदेश दिया गया है।
बीते दिनों अधिकारी कर्मचारी फेडरेशन के बैनर तले तीन दिवसीय प्रदेश व्यापी हड़ताल आयोजित की गई थी। इसी दौरान छत्तीसगढ़ कर्मचारी,अधिकारी फेडरेशन एमसीबी के जिला संयोजक गोपाल सिंह को कलेक्टर ने निलंबित कर दिया था। संभागायुक्त ने गोपाल सिंह को बहाल करते हुए कलेक्टर के आदेश को खारिज कर दिया है।
हड़ताल का समर्थन मांगना कलेक्टर को नागवार गुजरा
इस मामले में अपीलार्थी गोपाल सिंह, व्यायाम शिक्षक, शा.उ.मा.वि. बेलबहरा, वि.ख. मनेन्द्रगढ़ जिला एम.सी.बी में पदस्थ हैं। उन्होंने बताया कि वे छत्तीसगढ़ कर्मचारी,अधिकारी फेडरेशन एमसीबी का जिला संयोजक हैं। तीन दिवसीय आंदोलन के दूसरे दिन 30 दिसंबर 2025 को वे हड़ताल के समर्थन में कर्मचारियों के सहयोग हेतु कलेक्टर कार्यालय मनेन्द्रगढ़ गए थे और बिना किसी जोर-जबरदस्ती के सविनय निवेदन कर उन्होंने कर्मचारियों से स्वेच्छा से हड़ताल में शामिल होने हेतु सर्मथन मांगा। उनके द्वारा किसी भी कर्मचारी के विरूद्ध दुर्व्यवहार एवं अभद्र भाषा का प्रयोग नहीं किया गया था। कलेक्टर, एमसीबी द्वारा उनके विरूद्ध एक पक्षीय कार्यवाही करते हुए उन्हें निलंबित कर दिया गया है जो पूर्णतः द्वेषपूर्ण एवं त्रुटिपूर्ण है। कलेक्टर का आदेश प्राकृतिक न्याय सिद्धांतों के विपरीत है।
कमिश्नर कोर्ट ने कलेक्टर कार्यालय को नोटिस जारी कर मूल दस्तावेज पेश करने का निर्देश दिया था। कलेक्टर, एम.सी.बी. ने 02 जनवरी 2026 को जवाब सहित मूल अभिलेख पेश किया। कमिश्नर कोर्ट ने अपने फैसले में लिखा है कि अपीलार्थी द्वारा इस बार पर जोर दिया गया है कि, उसके पक्ष को नहीं सुना गया है और नैसर्गिक न्याय सिद्धांत के विरूद्ध उसके विरूद्ध निलंबन का आदेश पारित कर दिया गया।
कमिश्नर ने अपने फैसले में कहा, कलेक्टर ने आदेश जारी करते वक्त नैसर्गिक न्याय सिद्धांत का पालन नहीं किया है। प्रारंभिक न्याय का यह तकाजा है कि संबंधित व्यक्ति को कारण दर्शित करने विषयक युक्तियुक्त अवसर दिया जाए। ऐसा अवसर दिए बिना कोई आदेश पारित करना नैसर्गिक न्याय सिद्धान्त के विरूद्ध है। उक्त प्रकरण मेंआदेश पारित करने के पूर्व अपीलार्थी को सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर प्रदाय नहीं किया गया है। लिहाजा कलेक्टर, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर द्वारा 30 दिसंबर 2025 को पारित निलंबन आदेश विधि एवं प्रक्रियाओं का पालन नहीं करने से एतद् द्वारा अपास्त किया जाता है।
कोर्ट ने अपने फैसले में लिखा है कि अपीलार्थी गोपाल सिंह, व्याख्याता, शा.उ.मा.वि. बेहबहारा वि.ख. मनेन्द्रगढ़ जिला एम.सी.बी. को निलंबन से बहाल कर पूर्व पदस्थापना स्थान शा.उ.मा.वि. बेलबहरा, वि.ख. मनेन्द्रगढ़ जिला एम.सी.बी. में पदस्थ किया जाता है तथा निलंबन अवधि कार्य अवधि मान्य करते हुए प्रकरण नस्तीबद्ध किया जाता है।



