टीआरपी डेस्क। रायपुर स्थित राजीव भवन में कांग्रेस की पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी (PAC) और नवनियुक्त जिला अध्यक्षों की संयुक्त बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता प्रदेश प्रभारी सचिन पायलट ने की। इस दौरान कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर मनरेगा को कमजोर करने और उसका नाम बदलकर राज्यों पर अतिरिक्त बोझ डालने का आरोप लगाते हुए प्रदेशव्यापी आंदोलन शुरू करने का निर्णय लिया।
बैठक में तय किया गया कि 10 जनवरी से 25 फरवरी तक प्रदेशभर में VB-GRAM-G विधेयक के विरोध में ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ अभियान चलाया जाएगा। इस अभियान के तहत कांग्रेस कार्यकर्ता ग्राम पंचायत से लेकर विधानसभा स्तर तक रोजगार के अधिकार को लेकर सड़क पर उतरेंगे और गांधीवादी तरीके से आंदोलन करेंगे।
सचिन पायलट ने कहा कि केंद्र सरकार दुर्भावनापूर्ण तरीके से मनरेगा को समाप्त करने की दिशा में कदम उठा रही है। उन्होंने बताया कि एआईसीसी के निर्देशानुसार 10 जनवरी को सभी जिलों में मनरेगा के मुद्दे पर प्रेस वार्ता की जाएगी। इसके बाद एक दिवसीय उपवास रखा जाएगा। 26 जनवरी को ग्राम पंचायतों के माध्यम से इस मुद्दे पर प्रस्ताव पारित कराए जाएंगे। पायलट ने कहा कि यह जनहित का विषय है, इसलिए कांग्रेस के हर कदम पर जनता का समर्थन मिलेगा और आगे विधानसभा घेराव भी किया जाएगा।
पायलट ने आरोप लगाया कि सरकार इस फैसले के जरिए सबसे गरीब और वंचित वर्गों के अधिकारों का हनन करना चाहती है। उन्होंने सभी जिला अध्यक्षों को निर्देश दिए कि कांग्रेस का हर कार्यकर्ता गांव-गांव और मंडल स्तर तक जाकर लोगों को जागरूक करेगा। बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज, नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत, पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव, पूर्व मंत्री ताम्रध्वज साहू सहित कई वरिष्ठ नेता और पदाधिकारी मौजूद रहे।
अभियान की रूपरेखा के तहत 10 जनवरी को सभी डीसीसी कार्यालयों में जिला स्तर पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अभियान का औपचारिक शुभारंभ किया जाएगा। मीडिया को प्रस्तावित कानून से ग्रामीण रोजगार और आजीविका पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों की जानकारी दी जाएगी।
11 जनवरी को जिला मुख्यालयों और प्रमुख सार्वजनिक स्थलों पर पार्टी नेताओं, निर्वाचित जनप्रतिनिधियों और मनरेगा श्रमिकों की मौजूदगी में एक दिवसीय उपवास और प्रतीकात्मक विरोध किया जाएगा।
12 से 29 जनवरी तक सभी ग्राम पंचायतों में चौपाल और जनसंपर्क कार्यक्रम आयोजित होंगे। इस दौरान कांग्रेस अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष के पत्र ग्राम प्रधानों, पूर्व प्रधानों, रोजगार सेवकों और मनरेगा श्रमिकों तक पहुंचाए जाएंगे। साथ ही विधानसभा स्तर पर नुक्कड़ सभाएं और पर्चा वितरण भी किया जाएगा।
30 जनवरी को वार्ड और ब्लॉक स्तर पर शांतिपूर्ण धरने दिए जाएंगे, जिनमें अहिंसा, संवैधानिक मूल्यों और काम के अधिकार पर जोर दिया जाएगा। इसके बाद 31 जनवरी से 6 फरवरी तक जिला कलेक्टर और जिला मजिस्ट्रेट कार्यालयों के सामने जिला स्तरीय धरने होंगे और VB-GRAM-G विधेयक को वापस लेने तथा मनरेगा को उसके मूल स्वरूप में बहाल करने की मांग करते हुए ज्ञापन सौंपे जाएंगे।
7 से 15 फरवरी के बीच पीसीसी के नेतृत्व में राज्य स्तर पर विधानसभा घेराव किया जाएगा। इस दौरान बड़े पैमाने पर कार्यकर्ताओं की भागीदारी के जरिए केंद्र सरकार की नीतियों और राज्यों पर डाले जा रहे वित्तीय बोझ को उजागर किया जाएगा। 16 फरवरी से 25 फरवरी 2026 क्षेत्रीय एआईसीसी रैलियां निकाली जायेगी।


