टीआरपी डेस्क। कोयला तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के दौरान प्रवर्तन निदेशालय और पश्चिम बंगाल सरकार के बीच टकराव खुलकर सामने आ गया है। ईडी ने आरोप लगाया है कि छापेमारी के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनावी रणनीति सलाहकार संस्था आई-पैक (I-PAC) के प्रमुख प्रतीक जैन के आवास से एक लैपटॉप, मोबाइल फोन और कई अहम दस्तावेज अपने साथ ले लिए। ईडी ने इसे जांच में सीधा हस्तक्षेप बताते हुए हाई कोर्ट का रुख किया है। इस मामले पर शुक्रवार को सुनवाई होने की संभावना है।

ईडी का कहना है कि गुरुवार को कोयला तस्करी और उससे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में बंगाल और दिल्ली के कुल 10 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की गई थी। कार्रवाई सीबीआई की नवंबर 2020 में दर्ज एफआईआर और उसके आधार पर ईडी द्वारा दर्ज ईसीआईआर के तहत की जा रही थी। इसी दौरान यह मामला विवाद का रूप ले बैठा।

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जांच एजेंसी के मुताबिक, इस केस के मुख्य आरोपी अनूप माझी और उसके सिंडिकेट पर ईसीएल के पट्टा क्षेत्रों से अवैध कोयला खनन कर उसे पश्चिम बंगाल के विभिन्न जिलों में खपाने का आरोप है। ईडी की जांच में सामने आया है कि इस अवैध कारोबार से हुई कमाई को हवाला नेटवर्क के जरिए इधर-उधर घुमाया गया। इसी कड़ी में यह भी दावा किया गया है कि इस नेटवर्क के जरिए इंडियन पीएसी यानी आई-पैक कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड को बड़ी मात्रा में फंड ट्रांसफर किया गया।

ईडी का आरोप है कि जब प्रतीक जैन के ठिकाने पर तलाशी चल रही थी, उसी दौरान दोपहर में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भारी पुलिस बल और अपने काफिले के साथ वहां पहुंचीं। एजेंसी के अनुसार, मुख्यमंत्री ने परिसर में जाकर कुछ महत्वपूर्ण भौतिक दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण अपने कब्जे में ले लिए। इसके बाद उनका काफिला आई-पैक के कार्यालय पहुंचा, जहां कथित तौर पर राज्य पुलिस और मुख्यमंत्री के सहयोगियों ने डिजिटल और दस्तावेजी साक्ष्यों को हटाया।

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इस पूरे घटनाक्रम में कोलकाता पुलिस की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। ईडी का दावा है कि छापेमारी के दौरान पुलिस आयुक्त और दक्षिण डिवीजन के उपायुक्त समेत वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और ईडी अधिकारियों की पहचान की जांच की गई। एजेंसी का कहना है कि यह हस्तक्षेप पीएमएलए के तहत चल रही जांच में गंभीर बाधा है।

वहीं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए छापेमारी को राजनीतिक साजिश करार दिया है। दूसरी ओर ईडी ने सफाई दी है कि उसकी कार्रवाई किसी राजनीतिक दल या चुनाव से जुड़ी नहीं है। एजेंसी का कहना है कि यह पूरी तरह साक्ष्यों पर आधारित और कानून के तहत की गई कार्रवाई है तथा किसी भी पार्टी कार्यालय को निशाना नहीं बनाया गया है।