टीआरपी। fruit, flower, and vegetable exhibition : प्रकृति की ओर सोसायटी द्वारा गांधी उद्यान में आयोजित पुष्प प्रदर्शनी में विधानससभा और घड़ी चौक की प्रतिकृति आकर्षण का केंद्र है। इन दोनों प्रतिकृतियों को मनमोहक फूलों से सजाया गया है। प्रदर्शनी को देखने के लिए राजधानीवासी उमड़ पड़े। प्रदर्शनी में नाबार्ड के तत्वावधान में तकनीकी एवं विशेषज्ञ व्याख्यान का आयोजन किया गया। इसमें प्रदेश के विविध जिलों से 300 से अधिक किसान, स्व सहायता समूह, एनजीओ, एफपीओ के कार्यकर्ता शामिल हुए।
मुख्य अतिथि शीतांशु शेखर ने बताया कि किस प्रकार नाबार्ड ग्रामीण एवं पिछड़े क्षेत्रों के विकास हेतु वित्तीय सहायता प्रदान कर किसानों, स्व-सहायता समूहों एवं ग्रामीण उद्यमों को सशक्त बना रहा है।
विशेषज्ञ वक्ता अनंता शिंदे ने छत्तीसगढ़ में नाबार्ड द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी। डॉ. मेनका भारतीदासन ने माइक्रोग्रीन में व्यावसायिक संभावनाओं पर प्रकाश डाला, वहीं डॉ. जितेंद्र सिंह ने प्रोटेक्टेड कल्टीवेशन (संरक्षित खेती) के लाभ बताए। डॉ. एल. एस. वर्मा ने फूलों के माध्यम से व्यवसाय की संभावनाओं को रेखांकित किया। डॉ. अनिल चौहान ने विभिन्न फल, फूल एवं पौधों की नर्सरी स्थापना के माध्यम से किसानों की आय कई गुना बढ़ाने के व्यावहारिक उपायों की जानकारी दी।
उद्यानिकी विभाग से कैलाश पैकरा ने शासन की विभिन्न योजनाओं से किसानों को होने वाले लाभों पर प्रकाश डाला। संचालन डॉ. विजय जैन ने किया। कार्यक्रम संयोजक डॉ. जितेंद्र त्रिवेदी रहे। आयोजन की अध्यक्षता प्रकृति की ओर सोसायटी के अध्यक्ष मोहन वर्ल्यानी एवं दलजीत बग्गा ने की।
पुष्प प्रदर्शनी का भ्रमण कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने किया। उन्होंने सभी स्टॉलों का अवलोकन कर फूलों से निर्मित विधानसभा एवं घड़ी चौक की विशेष सजावट की प्रशंसा की तथा प्रकृति की ओर सोसायटी द्वारा किए जा रहे कार्यों को सराहनीय एवं प्रेरणादायी बताया। महापौर मीनल चौबे ने भी पुष्प प्रदर्शनी का भ्रमण किया एवं विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया।
पुष्प प्रदर्शनी में विविध आयोजन को सफल बनाने में प्रकृति की ओर सोसायटी के अध्यक्ष मोहन वर्ल्यानी, कार्यक्रम संयोजक डॉ. अनिल चौहान, सचिव निर्भय धारीवाल, जयेश पिथालिया, डॉ. विजय जैन, डॉ. जितेंद्र त्रिवेदी, दलजीत बग्गा, डी. के. तिवारी, शिल्पी नागपुरे, मनीषा त्रिवेदी, सर्वत सेठी, लक्ष्मी यादव, चतर सिंह सलूजा, डॉ. पुरुषोत्तम चंद्राकर , सुनीता चांसोरिया एवं ममता मिश्रा का योगदान रहा।



