टीआरपी। Jamboree festival : पूर्व संसदीय सचिव उपाध्याय ने कहा है कि बिना विधिवत टेंडर के करोड़ों रुपये खर्च किए गए। शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने आयोजन स्थल का भौतिक सत्यापन किया या नहीं? यदि किया था, तो इतनी भारी अनियमितताएं कैसे नजरअंदाज हो गईं? और यदि नहीं किया था, तो फिर करोड़ों रुपये की राशि किस आधार पर जारी कर दी गई? पांच करोड़ रुपये के काम में दो करोड़ रुपये केवल अस्थायी शौचालयों पर खर्च हो जाएं। क्या यह जंबूरी थी या अस्थायी निर्माण का महोत्सव?
पूर्व विधायक ने कहा है कि शिक्षा विभाग, जो स्वयं छात्रों को नैतिकता, ईमानदारी और जिम्मेदारी का पाठ पढ़ाता है, उसी विभाग की निगरानी में अगर ऐसे आयोजन सवालों के घेरे में आ जाएं, तो जिम्मेदारी तय होना लाज़मी है। करोड़ों रुपये जारी करने वाले अधिकारी, और विभागीय नेतृत्व इस सवाल से नहीं बच सकते कि उन्होंने आखिर किस आधार पर आंख मूंदकर भुगतान को हरी झंडी दी।
उपाध्याय ने कहा कि 1200 लोगों के रहने के लिए जो स्विस टेंट बनाये गए है उस पर 64 लाख रूपये का बिल वसूलने का ऑर्डर हुआ है। इसी तरह 15000 बच्चो के रुकने के लिए 2000 टेंट बनाये गए है जिसके लिए 76 लाख वसूलने का कार्य देश हुआ है। आइटम नंबर 28 में 2000 टैंट बनाये गए है जिसके लिए 76 लाख रुपये का बिल बनाने का कार्यदेश हुआ है।
जेम पोर्टल पर बुलाई गई निविदा अनुसार 5-1-26 कों दिए गए कार्य आदेश अनुसार 400 टॉयलेट्स और 2000 टेंट का अस्थायी निर्माण कार्य अमर भारत किराया भंडार द्वारा पूर्ण कर दिया गया है। उपाध्याय का कहना है कि दो दिन बाद सत्यापन के लिए कोई साक्ष्य प्रमाण नहीं मिलेगा कि कितने टॉयलेट और टेंट का निर्माण किया गया और कितने टॉयलेट और टेंट का भुगतान लिया गया।



