बिलासपुर। कोरबा जिले में जिला खनिज न्यास फंड के कथित दुरुपयोग को लेकर दायर जनहित याचिका पर सोमवार को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि शिकायत की जांच के लिए बिलासपुर संभाग के आयुक्त ने एक जांच समिति का गठन कर दिया है। गठित समिति की अध्यक्षता उपायुक्त (विकास), बिलासपुर संभाग करेंगे।
उपायुक्त की यह समिति कोरबा जिले में डीएमएफ फंड से जुड़े सभी आरोपों की जांच करेगी और तथ्यों के आधार पर रिपोर्ट तैयार करेगी।
खनन प्रभावित इलाकों में खर्च करने को लेकर याचिका
हाई कोर्ट में DMF को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता लक्ष्मी चौहान, अजय श्रीवास्तव और सपुरन कुलदीप ने जनहित याचिका दायर की है। इनकी दलील है कि DMF के फंड को गाइड लाइन के मुताबिक खनन से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष प्रभावित इलाकों में खर्च किया जाए। आरोप है कि कोरबा जिले को DMF से अब तक मिले लगभग 10 हजार करोड़ रुपयों का गैर जरूरी कार्यों में अनाप शनाप तरीके से खर्च किया गया है। यही हाल पूरे छत्तीसगढ़ का रहा है और अब तक DMF के फंड में हुए दर्जनों घोटाले उजागर हो चुके हैं।
इस मामले को लेकर हाई कोर्ट में हुई सुनवाई में अतिरिक्त महाधिवक्ता प्रवीण दास ने अदालत को बताया कि यह शिकायत खनन मंत्रालय, भारत सरकार के अवर सचिव द्वारा 20 नवंबर 2024 को भेजे गए पत्र के माध्यम से राज्य सरकार तक पहुंची थी। इसके बाद बिलासपुर संभाग आयुक्त ने इस शिकायत को कोरबा जिला के जिलाधिकारी को अग्रेषित कर दिया।
याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता सुदीप श्रीवास्तव ने मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा की खंडपीठ को बताया कि हाईकोर्ट नियम, 2007 के तहत आवश्यक सुरक्षा राशि 5 जनवरी 2026 को जमा कर दी गई है। इसके पहले की सुनवाई में याचिकाकर्ताओं ने पीआईएल की सुरक्षा निधि 15 हजार रुपये को कम करने का आवेदन किया था, जिसे हाई कोर्ट ने अस्वीकार कर दिया था।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता को अपनी शिकायत के निराकरण के लिए 14 जनवरी 2026 को सुबह 11 बजे उपस्थित होने के लिए बुलाया गया है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 30 जनवरी को तय की है।



