टीआरपी डेस्क। माघ मेला 2026 के दूसरे प्रमुख स्नान पर्व मकर संक्रांति पर आज संगम तट पर श्रद्धालुओं और कल्पवासियों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। साधु-संतों, कल्पवासियों और आम श्रद्धालुओं ने एक साथ संगम की पवित्र धारा में आस्था की डुबकी लगाई। चारों ओर हर-हर गंगे और जयकारों के बीच आस्था का विराट दृश्य देखने को मिला।
स्थानीय पुजारी रविशंकर मिश्रा ने बताया कि मकर संक्रांति सूर्य के उत्तरायण में प्रवेश का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इस दिन सूर्योदय से सूर्यास्त तक का समय अत्यंत शुभ माना जाता है। सूर्य देव की पूजा और गायत्री मंत्र का जाप विशेष फलदायी होता है, इसलिए संगम स्नान का महत्व और भी बढ़ जाता है।
स्नान के लिए पहुंचे लोगों ने प्रशासन और शासन की व्यवस्थाओं की सराहना की। साफ-सफाई, सुरक्षा और पुलिस व्यवस्था को सराहनीय बताते हुए कहा कि वे किसी विशेष मनोकामना के साथ नहीं आए, बल्कि ईश्वर के प्रति आभार व्यक्त करने के लिए संगम स्नान किया है।
मेला प्रशासन के अनुसार, दोपहर 12 बजे तक संगम तट पर 54 लाख से अधिक श्रद्धालु स्नान कर चुके थे। अनुमान है कि शुभ मुहूर्त पूरे दिन रहने के कारण शाम तक यह संख्या दो करोड़ के पार जा सकती है। सुबह 10 बजे तक 36 लाख और सुबह 8 बजे तक करीब 21 लाख श्रद्धालुओं ने स्नान किया था। प्रशासन ने इस बार दो से ढाई करोड़ श्रद्धालुओं के स्नान का अनुमान जताया है।
भीड़ और यातायात व्यवस्था को नियंत्रित करने के लिए संवेदनशील चौराहों पर विशेष इंतजाम किए गए हैं। जाम की आशंका वाले आठ स्थानों को चिह्नित कर त्वरित कार्रवाई के लिए क्यूआरटी तैनात की गई है। प्रत्येक क्यूआरटी में छह पुलिसकर्मी और एक वाहन शामिल है। ट्रैफिक कंट्रोल रूम से स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। जाम की स्थिति में एसीपी, एसएचओ और एसआई को जिम्मेदार ठहराया गया है।
इस बीच, माघ मेले में आस्था से जुड़े कई दृश्य चर्चा का विषय बने हुए हैं। सोशल मीडिया पर चर्चित चेहरे और यूट्यूबर भी मेले में पहुंचे हैं, लेकिन इस बार चर्चा का केंद्र संतों की तपस्या, कल्पवास कर रहे बच्चों और श्रद्धालुओं की आस्था बनी हुई है। प्रयागराज में सुबह घना कोहरा छाए रहने के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ और लोग लगातार संगम तट पर स्नान के लिए पहुंचते रहे।



