टीआरपी डेस्क। भारतीय जनता पार्टी के 12वें राष्ट्रीय अध्यक्ष का ऐलान हो चुका है। नितिन नबीन भाजपा के नबीन राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है। सोमवार को राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव में नितिन नबीन को पहले ही निर्विरोध चुना गया। बता दें कि, भाजपा पार्टी की ओर से चुनाव का शेड्यूल जारी होने के बाद से ही नितिन नबीन को बधाई देने का सिलसिला शुरू हो चुका था। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नितिन नबीन को यह जिम्मेदारी दी और इसी के साथ वे राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने वाले सबसे युवा नेता के तौर पर शामिल हो चुके हैं।
नितिन नबीन का राजनीतिक करियर
नितिन नबीन का राजनीति में प्रवेश योजनाबद्ध नहीं था, बल्कि परिस्थितियों का परिणाम था। साल 2006 में उनके पिता, भाजपा के वरिष्ठ नेता और बिहार के पूर्व विधायक नवीन किशोर सिन्हा के निधन के बाद पार्टी ने उन्हें पटना पश्चिम उपचुनाव में अपना उम्मीदवार बनाया। मात्र 26 साल की उम्र में नितिन ने अपनी पढ़ाई छोड़कर सक्रिय राजनीति में कदम रखा। यह निर्णय कर्तव्य और परिवार की अपेक्षाओं से प्रेरित था, जिसने उनके 20 साल लंबे राजनीतिक सफर की नींव रखी। 2006 के उपचुनाव में जीत के बाद नितिन ने पीछे मुड़कर नहीं देखा।

नितिन नबीन भले ही लो-प्रोफाइल नेता माने जाते हैं, लेकिन वे राजनीति में अनुभवशील हैं। वर्ष 2021 से वे बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के एक्स-ऑफिशियो सदस्य और मध्य भारत के छत्तीसगढ़ राज्य के प्रभारी रहे हैं। 2021 में उन्हें नीतीश कुमार सरकार में मंत्री बनाया गया था, लेकिन 2022 में नीतीश कुमार के बीजेपी से अलग होने के बाद उनका कार्यकाल छोटा रह गया। इसके बाद नबीन ने अपना अधिक समय छत्तीसगढ़ की राजनीतिक जिम्मेदारियों पर केंद्रित किया।
अन्य कई भाजपा नेताओं की तरह नबीन ने भी राजनीति की शुरुआत अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से की थी। उनके पिता नवीन किशोर सिन्हा भी संघ परिवार की विचारधारा के प्रति प्रतिबद्ध थे। नितिन नबीन के पास कार्यकर्ता, संगठनकर्ता और रणनीतिकार तीनों भूमिकाओं का व्यापक अनुभव है। उनका संगठनात्मक कार्य योजनाबद्ध रणनीति पर आधारित रहा है, जिसे बीजेपी नेतृत्व लंबे समय से महत्व देता आया है। युवा और अनुभवी दोनों होने के कारण उन्हें अगली पीढ़ी के नेतृत्व का चेहरा माना जाता है।
26 साल की उम्र से ही पार्टी में संभाला नेतृत्व
पिता के जनवरी, 2006 में निधन के बाद मात्र 26 वर्ष की उम्र में नबीन ने 2006 का उपचुनाव भारी बहुमत से जीता और 82 प्रतिशत से अधिक वोट हासिल किए। परिसीमन के बाद पटना पश्चिम सीट का नाम बदलकर बांकीपुर हुआ, जहां से नबीन 2010 से लगातार जीतते आ रहे हैं। बांकीपुर से जीत के बाद वे बीजेपी युवा मोर्चा के राष्ट्रीय नेतृत्व में शामिल हुए और 2010 में उन्हें भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) का राष्ट्रीय महामंत्री भी बनाया गया। वहीं, 2023 में छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनावों में BJP की शानदार जीत के बाद नबीन को छत्तीसगढ़ का एकमात्र प्रभारी बनाया गया। इसके बाद 2024 में नीतीश कुमार के दोबारा बीजेपी के साथ आने के बाद नबीन दोबारा बिहार सरकार में मंत्री बने।
नितिन नबीन की छवि और उनका संघर्ष
कायस्थ समाज से आने वाले नितिन नबीन की सरल, गैर-आडंबरपूर्ण शैली बीजेपी की जमीनी राजनीति की छवि को मजबूत करती है। सालों की मेहनत, संगठन के प्रति निष्ठा और चुनावी जीत, नितिन का उभार इसी संस्कृति का उदाहरण है। बिहार और पूर्वी भारत से नेता को शीर्ष भूमिका देना, राष्ट्रीय स्तर पर क्षेत्रीय संतुलन का संकेत है. नितिन नवीन का सफर व्यक्तिगत संघर्ष, पारिवारिक विरासत और पार्टी के भरोसे का संगम है।
उनकी शांत नेतृत्व शैली, संगठनात्मक गहराई और लगातार चुनावी सफलता उन्हें बीजेपी के सबसे अहम उभरते नेताओं में शामिल करती है। ऐसे में नितिन नबीन की नियुक्ति यह दर्शाती है कि भाजपा ने उत्तराधिकार की परंपरा में बदलाव नहीं किया, बल्कि संगठनात्मक संतुलन बनाए रखा। नितिन को कार्यकारी अध्यक्ष बनाकर पार्टी ने स्पष्ट किया कि यह पद अनुभव और भरोसे का इनाम है, न कि सीधे अध्यक्ष पद का उत्तराधिकार।
भाजपा ने बंगाल के लिए खेला मास्टर स्ट्रोक
इस साल पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव है। माना जा रहा है कि, नितिन नबीन को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाकर भाजपा ने मास्टर स्ट्रोक कार्ड खेला है। क्यों कि, बंगाल में कायस्थों की अच्छी खासी आबादी है। वर्तमान में बंगाल में 27 लाख कायस्थ है। जो कि राज्य की कुल अनुमानित जनसंख्या का 2.7 प्रतिशत है। बंगाल में दो सीएम भी कायस्थ जाति के रह चुके हैं। इनमें ज्योति बसु और चटर्जी जो लंबे समय तक बंगाल के मुख्यमंत्री रहे। बिहार यूपी के बाद बंगाल में कायस्थ की संख्या काफी है। ये काफी शिक्षित वर्ग है। शिक्षा, प्रशासन के साथ साहित्य में भी इनकी पकड़ मजबूत है।



