बिलासपुर। बस्तर संभाग के भानुप्रतापपुर पूर्व वन मंडल के रिजर्व फॉरेस्ट से करीब 5,000 पेड़ों के रहस्यमय ढंग से गायब होने का मामला अब अदालत तक पहुंच गया है। इस प्रकरण को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने वन विभाग से नई जांच रिपोर्ट तलब की है। मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी।

इस मामले में याचिका के अनुसार भानुप्रतापपुर पूर्व वन मंडल के काचे गांव स्थित रिजर्व फॉरेस्ट क्रमांक 608 में गोदावरी इस्पात को माइनिंग लीज दी गई थी। इसमें पहले 100 हेक्टेयर और बाद में 32 हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र शामिल किया गया। प्रारंभिक जांच में यहां 20 सेमी से अधिक मोटाई वाले 11,600 पेड़ होने की जानकारी सामने आई थी।

पेड़ गायब करने का आरोप

वन विभाग ने करीब 6,000 पेड़ों की कटाई कर दी, लेकिन बजट समाप्त होने के कारण शेष पेड़ों की कटाई रोक दी गई। वर्ष 2018 में जब दोबारा टीम मौके पर पहुंची, तो बाकी पेड़ वहां मौजूद ही नहीं थे। यह स्थिति वन विभाग के लिए भी हैरान करने वाली रही।

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इस मामले में सामाजिक कार्यकर्ता राजेश रंगारी ने पहले आरटीआई के जरिए जानकारी मांगी और फिर शिकायत दर्ज कराई। अब अधिवक्ता समर्थ मरहास के माध्यम से जनहित याचिका दायर कर गोदावरी इस्पात की माइनिंग लीज निरस्त करने की मांग की गई है।

सरकार ने अदालत को बताया कि जांच दल की रिपोर्ट में पेड़ नहीं पाए गए और कुछ पेड़ कंपनी के वाहनों की आवाजाही से धंसी सड़क के नीचे दब गए। हालांकि डीएफओ ने इस रिपोर्ट पर असंतोष जताते हुए संशोधित रिपोर्ट मांगी है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने वन विभाग को नई रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।