रायपुर। छत्तीसगढ़ और कुछ अन्य राज्यों में संसदीय सचिवों की नियुक्ति और उन्हें सुविधाएं देने का मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। दरअसल, छत्तीसगढ़ के बाद अब दो राज्य हिमाचल प्रदेश और पश्चिम बंगाल से भी सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है, जिसे गंभीरता से लेते हुए कोर्ट सुनवाई के लिए तैयार हो गया है।
छत्तीसगढ़ में पूर्व में भाजपा की डॉ रमन सिंह की सरकार और फिर कांग्रेस की भूपेश बघेल की सरकार ने मंत्रियों के अलावा विधायकों की ससदीय सचिव के पद पर नियुक्तियां की थी। जिसके खिलाफ सोशल एक्टिविस्ट राकेश चौबे ने वर्ष 2018 में छत्तीसगढ़ हाइकोर्ट में याचिका दायर की।सुनवाई के दौरान सरकार के वकील ने कहा कि संसदीय सचिवों की केवल नियुक्तियां की गई हैं, उन्हें अलग से कोई लाभ या सुविधा नहीं दी जा रही है। इसी बीच राकेश चौबे ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर कर दी, तब सरकार से जवाब मांगा गया। सरकार ने इसके लिए समय मांगा, मगर जवाब नहीं दिया और यह मामला अटका रहा।
कालांतर में हिमाचल प्रदेश और पश्चिम बंगाल में भी संसदीय सचिवों की नियुक्ति हुई जिसके खिलाफ भाजपा ने सुको में याचिका दायर कर दी। जिसे कोर्ट ने गंभीरता से लिया राकेश चौबे दारा दायर याचिका में दोनों राज्यों के संसदीय सचिवों के मामले में दायर याचिकाओं को संलग्न कर दिया।
सोशल एक्टिविस्ट राकेश चौबे ने बताया कि सरकार अपने नेताओं को संसदीय सचिव का पद देकर उन्हें सुविधाएं दे रही थी। यह सुविधाएं बैक डोर से दी जा रही थी और उन सुविधाओं के पीछे खर्च किए जाने वाली राशि जनता के टैक्स से निकालकर दी जा रही थी थी, जो असंवैधानिक है। इसको लेकर हमने सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका लगाई है, जिस पर अब 16 मार्च को सुनवाई होगी।


