टीआरपी। Supreme Court order : देशभर के सभी स्कूलों में अब कक्षा 6वीं से 12 वीं तक की छात्राओं को मुफ्त में सैनिटरी पैड दिया जाएगा। यह आदेश सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और सभी राज्यों को दिया है। छात्राओं के लिए स्कूलों में मुफ्त सैनिटरी पैड उपलब्ध कराने हेतु एक ‘राष्ट्रीय नीति’  (National Policy) को तत्काल प्रभावी रूप से लागू करने का आदेश दिया है। मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पष्ट किया है कि शिक्षा के अधिकार के साथ-साथ छात्राओं की गरिमा और स्वास्थ्य का अधिकार भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ मिलकर ‘माहवारी स्वच्छता प्रबंधन’  (MHM) के लिए एक व्यापक योजना तैयार करने का आदेश दिया है।


सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि वे अपने यहां उपलब्ध सैनिटरी पैड वितरण और शौचालय सुविधाओं की वर्तमान स्थिति पर हलफनामा दाखिल करें। केंद्र सरकार को यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है कि देश के सबसे दूरदराज के क्षेत्रों में भी इस नीति का क्रियान्वयन हो।

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सुप्रीम कोर्ट के आदेश के प्रमुख तथ्य

  • सभी सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में छात्राओं को सैनिटरी पैड पूरी तरह से मुफ्त प्रदान किए जाएंगे।
  • स्कूलों में केवल पैड देना पर्याप्त नहीं है; इसके लिए छात्राओं के लिए अलग शौचालयों की व्यवस्था और पैड के सुरक्षित निपटान (Disposal)के लिए इंसिनरेटर (Incinerators) की सुविधा भी अनिवार्य होनी चाहिए।
  • स्कूलों में माहवारी से जुड़ी वर्जनाओं (Taboos) को तोड़ने के लिए व्यापक जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया जाए।

स्कूल नहीं जातीं लड़कियां

उल्लेखनीय है कि माहवारी शुरू होने के बाद या तो लड़कियां स्कूल छोड़ देती हैं। अथवा उचित सैनिटरी सुविधाओं के अभाव में लाखों छात्राएं हर महीने 4-5 दिन स्कूल नहीं जा पातीं।