रायपुर। छत्तीसगढ़ में ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी (आरईएओ) पद की भर्ती प्रक्रिया में हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। व्यापमं की परीक्षा पास कर नौकरी के लिए चयनित 13 अभ्यर्थी प्रमाणपत्र सत्यापन के दौरान अचानक ही गायब हो गए। इन्हें दूसरी बार भी दस्तावेज जांच के लिए बुलाया गया, लेकिन एक भी अभ्यर्थी उपस्थित नहीं हुआ।

बता दें कि ऐसी आशंका जताई गई थी कि ये अभ्यर्थी फर्जी प्रमाणपत्र के आधार पर स्वयं को श्रवण बाधित बताकर चयन प्रक्रिया में शामिल हुए थे। मगर अब दोबारा बुलावे के बावजूद अनुपस्थित रहने से यह संदेह और गहरा हो गया है।

फर्जी प्रमाणपत्र की आशंका

प्रमाणपत्र जांच से बचने के पीछे फर्जीवाड़े की आशंका इसलिए भी जताई जा रही है क्योंकि राज्य में अब तक 153 मामले ऐसे सामने आ चुके हैं, जिनमें फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र के आधार पर नौकरी हासिल की गई। इन मामलों में पकड़े गए कुछ लोग सुप्रीम कोर्ट की शरण भी ले चुके हैं, वहीं राज्य सरकार ऐसे मामलों पर कार्रवाई कर रही है।

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छत्तीसगढ़ दिव्यांग संघ के प्रदेश अध्यक्ष बोहित राम चंद्राकर ने कहा कि पहले ही आशंका जताई गई थी कि ये 13 अभ्यर्थी फर्जी प्रमाणपत्रधारी हो सकते हैं। अब उनके सामने न आने से यह बात और स्पष्ट होती जा रही है। उन्होंने मांग की कि इन सभी मामलों की गंभीरता से जांच हो और दोषियों को किसी भी हालत में छोड़ा न जाए।

जानें पूरा मामला

संचालनालय कृषि द्वारा ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी के 321 पदों पर सीधी भर्ती के लिए व्यापमं के माध्यम से परीक्षा कराई गई थी। चयनित अभ्यर्थियों में से 14 श्रवण बाधित श्रेणी के उम्मीदवारों को मूल प्रमाणपत्रों की जांच के लिए बुलाया गया। इनमें से केवल एक अभ्यर्थी उपस्थित हुआ, जबकि बाकी 13 गैरहाजिर रहे।

प्रमाणपत्र सत्यापन समिति ने इन 13 अनुपस्थित अभ्यर्थियों को अपात्र घोषित कर दिया। साथ ही यह अवसर दिया गया कि यदि वे आपत्ति दर्ज कराना चाहें तो 23 जनवरी तक स्वयं उपस्थित होकर आवश्यक दस्तावेजों के साथ दावा पेश कर सकते हैं। तय तारीख तक भी कोई अभ्यर्थी सामने नहीं आया जिसके बाद से फर्जी प्रमाणपत्र की आशंका और पुख्ता हो गई है।

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