SIR in Chhattisgarh: पिछले दिनों छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में फॉर्म 7 का दुरुपयोग करते हुए 1556 लोगों के नाम SIR की सूची से काटने के लिए दे दिए गए और दावा किया गया कि लोग संबंधित पते पर नहीं रहते। ऐसे ही मामले दूसरे कई जिलों में सामने आए हैं। धमतरी जिले में डेढ़ सौ लोगों के नाम सूची से काटने के लिए फॉर्म 7 जमा किया गया है। इन सभी को या तो उनके पते पर नहीं रहना बताया गया है या फिर उन्हें मृत बता दिया गया है।

छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के बीच नया विवाद सामने आया है। यहां बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज के लोगों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर आरोप लगाया कि फार्म 7 का दुरुपयोग कर सुनियोजित तरीके से मुस्लिम मतदाताओं के नाम काटने के लिए फर्जी आवेदन दिए गए हैं। इस मामले को लेकर समाज में गहरी नाराजगी देखी जा रही है.

सबसे चौंकाने वाला मामला नवागांव वार्ड की बुजुर्ग महिला बैतूल कौसर का बताया जा रहा है। आरोप है कि उन्हें मृत घोषित कर मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए आवेदन दिया गया, जबकि वह जीवित हैं। इस घटना ने स्थानीय लोगों में रोष और अविश्वास की स्थिति पैदा कर दी है।

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इस पूरे मामले पर आधारी नवागांव वार्ड के लोगों का कहना है कि करीब 150 मतदाताओं के नाम हटाने के लिए तहसीलदार और बूथ लेवल अधिकारियों के पास आवेदन दिए गए हैं। आरोप है कि इन आवेदनों में जिन लोगों के हस्ताक्षर दर्शाए गए हैं, वे भी कथित रूप से फर्जी हैं। लोगों का कहना है कि बिना उचित जांच और सत्यापन के नाम हटाने की कोशिश की जा रही है।

3 दिनों में कार्रवाई की मांग

धमतरी में मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों ने अपर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाए और जिन लोगों ने फर्जी आवेदन दिए हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई हो। समाज के लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि तीन दिन के भीतर उचित कदम नहीं उठाए गए, तो वे आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।

खुद को जिंदा साबित करने की जद्दोजहद

उधर कांकेर जिले के भानुप्रतापपुर से भी ऐसा ही एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां फॉर्म-7 के जरिए एक जिंदा मतदाता को मृत घोषित कर उसका नाम मतदाता सूची से काटने का आवेदन किया गया।

पीड़ित मतदाता समीउल्लाह अंसारी ने हैरानी जताते हुए कहा कि “मैं जिंदा हूं, फिर मेरे मृत होने का आवेदन कैसे दिया गया?” उन्होंने बताया कि उन्हें चौक पर लोगों से जानकारी मिली कि उनका नाम मतदाता सूची से हटाने का आवेदन किया गया है, जबकि वे रोज़ भानुप्रतापपुर के मुख्य चौक पर मौजूद रहते हैं और वर्षों से उसी स्थान पर निवास कर रहे हैं।

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इधर आवेदन पत्र में दर्ज नाम के आधार पर जब वार्ड क्रमांक 2 निवासी फूल सिंह से संपर्क किया गया, तो उन्होंने कहा कि उन्होंने ऐसा कोई आवेदन नहीं किया है और न ही वे इस मामले से किसी भी तरह जुड़े हैं।

विधायक ने जताया विरोध

मामले के सामने आने के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। क्षेत्र की विधायक सावित्री मंडावी ने कहा कि यह वही बात है, जिसकी आशंका पहले जताई जाती रही थी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी लगातार पूरे प्रदेश और देश में एफआईआर और मतदाता सूची से नाम काटे जाने के मामलों को उठाते रहे हैं और अब इसका जीता-जागता सबूत सामने आ गया है। विधायक ने बताया कि उनके सामने ही एक बुजुर्ग (समीउल्लाह अंसारी) मौजूद थे, जिनका नाम भी मतदाता सूची से काटने के लिए फॉर्म में शामिल किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि भानुप्रतापपुर क्षेत्र में कई मुस्लिम भाइयों के नाम काटने के लिए फॉर्म बांटे गए हैं। इसके अलावा रामपुर पुरी के पास आदिवासी समुदाय के कम से कम 40 लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाने के लिए आवेदन किए जाने की जानकारी मिली है। विधायक ने सवाल उठाया कि किरण नरेटी नाम से फॉर्म देने वाला व्यक्ति कौन है। उन्होंने कहा कि सभी लोगों के पास आधार कार्ड, पुश्तैनी जमीन और अन्य दस्तावेज मौजूद हैं और वे वर्षों से वहां खेती कर रहे हैं। विधायक सावित्री मंडावी ने एडीएम से पूरे मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

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कलेक्टर ने क्या कहा..?

कांकेर कलेक्टर ने कहा कि नियमों के तहत बीएलओ या ब्लॉक लेवल एजेंट कुछ आवेदन दे सकते हैं, लेकिन निर्धारित संख्या से अधिक आवेदन दिए जाने पर उन्हें मान्यता नहीं दी जाएगी। इस क्रम में प्रशासन पूरी कार्रवाई कर रहा है। हालांकि अधिकांश आवेदन जिनके नाम 2002 की सूची में हैं, उनमें कार्रवाई की संभावना कम है। फिर भी प्रशासन जांच कर रहा है कि किन्हीं शरारती तत्वों द्वारा आवेदन क्यों दिया गया। यदि इसमें किसी तरह से सरकार को बदनाम करने का प्रयास पाया जाता है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी।