टीआरपी। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहाँ किन्नर अखाड़े के संस्थापक ऋषि अजय दास और कई हिंदू किन्नरों ने “किन्नर जिहाद” का आरोप लगाया है। पीड़ितों का दावा है कि शहर के विभिन्न डेरों में हिंदू किन्नरों को डरा-धमकाकर उनका धर्म परिवर्तन कराया जा रहा है और उन्हें इस्लामी रीति-रिवाजों को मानने के लिए मजबूर किया जा रहा है।
यह मामला सीधे तौर पर धार्मिक स्वतंत्रता और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ा है। छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों में भी किन्नर समुदायों का बड़ा नेटवर्क है, ऐसे में टेरर फंडिंग और जबरन धर्मांतरण जैसे गंभीर आरोपों की गूंज पूरे मध्य भारत के सामाजिक ताने-बाने को प्रभावित कर सकती है।
टॉर्चर रूम और जबरन नमाज के आरोप
पीड़ित हिंदू किन्नरों ने मीडिया के सामने रोते हुए अपनी आपबीती सुनाई। उन्होंने आरोप लगाया कि भोपाल, सागर, इंदौर, और जबलपुर जैसे शहरों में मुस्लिम गुरु (नायक) हिंदू किन्नरों को बंधक बनाकर रखते हैं। उन्हें कथित तौर पर गोमांस खाने पर मजबूर किया जाता है और जबरन कलमा व नमाज पढ़वाई जाती है। ऋषि अजय दास के मुताबिक, कई डेरों में विशेष ‘टॉर्चर रूम’ बनाए गए हैं, जहाँ बात न मानने वालों को प्रताड़ित किया जाता है।
टेरर फंडिंग और शाहीन बाग का कनेक्शन
अजय दास ने आरोप लगाया कि हिंदू किन्नरों द्वारा होली-दिवाली पर मांगकर इकट्ठा किया गया पैसा मदरसों, मस्जिदों और टेरर फंडिंग में इस्तेमाल हो रहा है। उन्होंने देविका नाम की एक किन्नर का जिक्र करते हुए दावा किया कि शाहीन बाग आंदोलन के दौरान विदेशों (पाकिस्तान-बांग्लादेश) से फंडिंग ली गई थी। उन्होंने मांग की है कि देश भर के डेरों की जांच की जाए ताकि पता चल सके कि कौन हिंदू है और कौन मुस्लिम।
गद्दी परंपरा का विवाद
संस्थापक अजय दास ने बताया कि प्राचीन काल में तीन प्रमुख गादियाँ (घराने) होती थीं— जमाल दादा, कमाल दादा और गंगाराम। उनका आरोप है कि हिंदू घराना (गंगाराम) अब लगभग खत्म कर दिया गया है और मुस्लिम नायकों का वर्चस्व बढ़ गया है। उन्होंने तर्क दिया कि इस्लाम में ‘मांगना’ हराम है, फिर भी मुस्लिम गुरु हिंदू धर्म की परंपराओं का सहारा लेकर धन उगाही कर रहे हैं और उसी पैसे से इस्लामीकरण को बढ़ावा दे रहे हैं।
- मुख्य आरोपी स्थान: भोपाल, इंदौर, सागर, जबलपुर, इटारसी के किन्नर डेरे।
- प्रमुख आरोप: जबरन धर्मांतरण, गोमांस भक्षण, टेरर फंडिंग और शारीरिक प्रताड़ना।
- दावा: हिंदू त्योहारों पर एकत्रित राशि का उपयोग मस्जिदों और मदरसों के निर्माण में।
- मांग: किन्नर समुदाय के पहचान पत्रों की जांच और संदिग्ध फंडिंग पर रोक।
इन गंभीर आरोपों के बाद मध्य प्रदेश पुलिस और प्रशासन इस मामले की जांच शुरू कर सकता है। हिंदू संगठनों ने भी इस मुद्दे पर कड़ा रुख अख्तियार करने के संकेत दिए हैं। आने वाले दिनों में डेरों के प्रबंधन और फंडिंग की पारदर्शी जांच की मांग तेज होने की संभावना है।


