रायपुर। जिला उपभोक्ता आयोग ने एक बिल्डर को फ्लैट खरीदार के साथ वादाखिलाफी करने पर कड़ा आदेश सुनाया है। आयोग ने बिल्डर को निर्देश दिया है कि वह पीड़ित को तत्काल कवर्ड कार पार्किंग उपलब्ध कराए और मानसिक प्रताड़ना के लिए 10 हजार रुपए का हर्जाना भरे।

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में रियल एस्टेट में पार्किंग को लेकर बिल्डरों और खरीदारों के बीच अक्सर विवाद होता है। यह फैसला उन हजारों फ्लैट मालिकों के लिए नजीर बनेगा जिन्हें बिल्डर पैसे लेने के बावजूद बुनियादी सुविधाएं देने में टालमटोल करते हैं।

वादा करके पार्किंग देने से मुकरा बिल्डर

मामला रायपुर के शंकरनगर स्थित एक अपार्टमेंट का है। परिवादी राजेंद्र शर्मा ने आयोग को बताया कि उनके पुत्र विकल शर्मा ने साल 2009 में एक फ्लैट खरीदा था। बिल्डर ने कवर्ड पार्किंग के नाम पर 50 हजार रुपए अतिरिक्त लिए और इसकी रसीद भी दी थी। उस वक्त पार्किंग स्थल तैयार नहीं होने पर अस्थायी व्यवस्था दी गई थी, लेकिन बाद में वहां नई बिल्डिंग बनाकर पार्किंग देने से साफ इनकार कर दिया गया।

See also  Independence Day 2026: वंदे मातरम् के 150वें वर्ष पर दिखेगा ऐतिहासिक नजारा

उपभोक्ता आयोग का सख्त रुख

सुनवाई के दौरान आयोग ने पाया कि पार्किंग के लिए अलग से राशि लेने के बावजूद सुविधा न देना ‘सेवा में कमी’ की श्रेणी में आता है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बिल्डर को उसी अपार्टमेंट या उसके बिल्कुल नजदीक सुविधाजनक कवर्ड पार्किंग देनी होगी।

इस फैसले के बाद अब बिल्डर को तय समय सीमा के भीतर कवर्ड पार्किंग की व्यवस्था करनी होगी। यदि वह ऐसा नहीं करता है, तो परिवादी दोबारा आयोग की शरण में जाकर आदेश के निष्पादन की मांग कर सकता है।