टीआरपी । शिक्षा को केवल किताबों तक सीमित न रखकर उसे दुनिया से जोड़ने के लिए सरगुजा जिले के विकासखंड प्रेमनगर के शासकीय प्राथमिक शाला पीपरडांड ने एक सराहनीय कदम उठाया है। अब स्कूल की प्रार्थना सभा में विद्यार्थी केवल प्रार्थना ही नहीं करेंगे, बल्कि देश-दुनिया की प्रमुख खबरें भी पढ़ेंगे।
आज के डिजिटल युग में जहाँ बच्चों का ‘स्क्रीन टाइम’ (मोबाइल का उपयोग) बढ़ रहा है, वहीं पठन संस्कृति कमजोर हो रही है। इस पहल से ग्रामीण अंचल के बच्चों में न केवल सामान्य ज्ञान बढ़ेगा, बल्कि उनमें सोचने, समझने और तर्क करने की शक्ति विकसित होगी। यह मॉडल छत्तीसगढ़ के अन्य सरकारी स्कूलों के लिए एक मिसाल बन सकता है।
परीक्षा-केंद्रित नहीं, अब ज्ञान-केंद्रित होगी शिक्षा
विद्यालय के सहायक शिक्षक श्री राजेन्द्र जायसवाल के नेतृत्व में शुरू की गई इस पहल का उद्देश्य बच्चों को समसामयिक घटनाओं से रूबरू कराना है। नई व्यवस्था के तहत, स्कूल की प्रार्थना सभा अब एक ‘जागरूकता की पाठशाला’ में तब्दील हो गई है। छात्र-छात्राएं प्रतिदिन अखबार की प्रमुख सुर्खियां पढ़ते हैं, जिससे उनकी भाषा शैली और उच्चारण में सुधार हो रहा है।
सप्ताह में एक दिन विशेष ‘संपादकीय चर्चा’
इस पहल को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए स्कूल प्रबंधन ने विशेष योजना तैयार की है। सप्ताह में एक दिन विद्यार्थियों को किसी संपादकीय विषय पर मौलिक लेखन और समूह चर्चा के लिए प्रेरित किया जाएगा। इससे बच्चों में संवाद कौशल, अभिव्यक्ति की क्षमता और नैतिक मूल्यों का विकास होगा।
- स्कूल का नाम: शासकीय प्राथमिक शाला पीपरडांड, विकासखंड प्रेमनगर।
- पहल: दैनिक दिनचर्या में अखबार वाचन का समावेश।
- उद्देश्य: पठन संस्कृति को बढ़ावा देना और मोबाइल की लत कम करना।
- मुख्य गतिविधि: प्रार्थना सभा में समाचारों का वाचन और साप्ताहिक समूह चर्चा।
इस नवाचार की सफलता को देखते हुए शिक्षा विभाग इसे जिले के अन्य स्कूलों में भी लागू करने पर विचार कर सकता है। ग्रामीणों और अभिभावकों ने भी स्कूल की इस पहल का स्वागत किया है, जिससे आने वाले समय में बच्चों के सर्वांगीण विकास की नई राह खुलेगी।



