टीआरपी डेस्क। अभिनेता मनोज बाजपेयी की फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ पर मचे हंगामे के बीच अब सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने फिल्म के टाइटल पर कड़ी नाराजगी जताते हुए इस नाम के साथ फिल्म की रिलीज पर फिलहाल रोक लगा दी है। कोर्ट ने स्पष्ट लहजे में पूछा कि फिल्म के जरिए किसी समाज के विशेष वर्ग को इस तरह क्यों निशाना बनाया जा रहा है।
इस फिल्म के टाइटल को लेकर विरोध हो रहा था। सुप्रीम कोर्ट के इस हस्तक्षेप से यह संदेश गया है कि अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर किसी समुदाय की भावनाओं और सम्मान के साथ खिलवाड़ नहीं किया जा सकता।
हाईकोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट से भी झटका
फिल्ममेकर नीरज पांडे के लिए मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। हाईकोर्ट से झटका लगने के बाद अब शीर्ष अदालत ने भी सख्त रुख अपनाया है। सुनवाई के दौरान जजों ने कहा कि इस टाइटल के साथ फिल्म रिलीज नहीं होगी। साथ ही, फिल्म निर्माता को एक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया गया है, जिसमें यह स्पष्ट करना होगा कि फिल्म किसी भी समाज या समुदाय का अपमान नहीं करती है।
CBFC की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) की भूमिका पर भी गहरी नाराजगी व्यक्त की। कोर्ट ने सवाल उठाया कि फिल्म को सर्टिफिकेट देते समय क्या इन विवादित पहलुओं पर गंभीरता से विचार किया गया था? अदालत की टिप्पणियों से साफ है कि वह सेंसर बोर्ड की जवाबदेही से संतुष्ट नहीं है।
‘सामाजिक व्यंग्य’ बनाम ‘भावनाओं का अपमान’
याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि फिल्म का शीर्षक एक विशेष समुदाय को टारगेट करता है, जिससे उनकी भावनाएं आहत हुई हैं। दूसरी ओर, निर्माता पक्ष का तर्क है कि फिल्म का उद्देश्य किसी का अपमान करना नहीं है, बल्कि यह केवल एक सामाजिक व्यंग्य है। हालांकि, कोर्ट ने फिलहाल इन तर्कों को स्वीकार नहीं किया है।


