Brahmaputra underwater road-rail tunnel project Assam.

टीआरपी डेस्क। भारत सरकार पूर्वोत्तर (Northeast) में सामरिक और आर्थिक क्रांति लाने के लिए दुनिया के सबसे चुनौतीपूर्ण इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट्स में से एक को अंजाम देने जा रही है। असम में ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे देश की पहली ऐसी सुरंग (Underwater Tunnel) बनाने की तैयारी है, जिसमें सड़क और रेल लाइन दोनों एक साथ होंगी। लगभग ₹19,000 करोड़ की अनुमानित लागत वाला यह प्रोजेक्ट भारत की पूर्वी सीमाओं की सुरक्षा और कनेक्टिविटी का चेहरा बदल देगा।

अरुणाचल प्रदेश के जरिए चीन के साथ लगने वाली एलएसी (LAC) पर भारतीय सेना की पहुंच को तेज करने के लिए यह सुरंग ‘ब्रह्मास्त्र’ साबित होगी। अभी नदी पार करने में लगने वाले 6 घंटे के समय को यह टनल महज 30 मिनट में समेट देगी।

प्रोजेक्ट की 5 बड़ी बातें:

  1. दोहरी सुरंग (Twin Tubes): नदी के नीचे दो ट्यूब वाली सुरंग बनाई जाएगी। एक ट्यूब विशेष रूप से सड़क यातायात के लिए और दूसरी रेल लाइन के लिए होगी
  2. इन दो शहरों को जोड़ेगी: यह सुरंग उत्तर तट पर स्थित गोहपुर को दक्षिण तट पर स्थित नुमलीगढ़ से सीधे जोड़ेगी।
  3. लागत: केंद्रीय कैबिनेट जल्द ही ₹18,600 से ₹19,000 करोड़ के इस बजट को मंजूरी देने वाली है।
  4. प्राकृतिक आपदा से सुरक्षा: बाढ़ और भारी बारिश के दौरान अक्सर पुल क्षतिग्रस्त हो जाते हैं, लेकिन पानी के नीचे होने के कारण यह सुरंग हर मौसम में सुरक्षित रहेगी।
  5. सुरक्षा कवच: युद्ध जैसी स्थिति में दुश्मन के हवाई हमलों से पुलों को खतरा रहता है, लेकिन अंडरवाटर टनल सेना, टैंक और भारी हथियारों की आवाजाही के लिए सबसे सुरक्षित रास्ता होगी।
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पूर्वोत्तर के लिए ‘गेम-चेंजर’ साबित होगी टनल

पूर्व बीआरओ (BRO) महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल राजीव चौधरी (सेवानिवृत्त) के अनुसार, यह सुरंग सिर्फ इंजीनियरिंग का चमत्कार नहीं बल्कि एक सामरिक जीवनरेखा (Strategic Lifeline) है। असम की चाय, फल-सब्जियां और अन्य स्थानीय उत्पाद अब बिना किसी देरी के देश के अन्य हिस्सों तक पहुंच सकेंगे। बेहतर कनेक्टिविटी को देखते हुए बड़ी प्राइवेट कंपनियां अब पूर्वोत्तर में अपनी फैक्ट्रियां लगाने के लिए प्रोत्साहित होंगी। पर्यटकों के लिए घंटों का सफर मिनटों में बदल जाएगा, जिससे असम और अरुणाचल के पर्यटन उद्योग को पंख लगेंगे।

भूगोल की चुनौती को अवसर में बदला

पूर्वोत्तर भारत लंबे समय से अपने कठिन भूगोल और संकरे रास्तों (जैसे चिकन नेक कॉरिडोर) की वजह से विकास की मुख्यधारा से कटा रहा है। यह सुरंग उस निर्भरता को कम करेगी और भारत की पूर्वी सीमा को अभेद्य बनाएगी।