टीआरपी डेस्क। मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में बारूद का ढेर कभी भी सुलग सकता है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच जो बाइडन प्रशासन के बाद अब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कड़ाई ने तेहरान की नींद उड़ा दी है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका ने दुनिया का सबसे बड़ा और आधुनिक एयरक्राफ्ट कैरियर USS जेराल्ड आर. फोर्ड को मिडिल ईस्ट रवाना कर दिया है। यह तैनाती ऐसे समय में हुई है जब क्षेत्र में पहले से ही USS अब्राहम लिंकन तैनात है।

अमेरिकी नौसेना के पास कुल 11 एयरक्राफ्ट कैरियर हैं। एक साथ दो कैरियर की मौजूदगी का मतलब है कि अमेरिका अब ईरान के परमाणु ठिकानों, सैन्य अड्डों और कमांड सेंटरों पर समुद्र और आसमान दोनों से भीषण हमले करने की स्थिति में आ गया है। यह केवल एक जहाज नहीं, बल्कि एक न्यूक्लियर-पावर्ड ‘सुपर कैरियर’ है। इसकी क्षमताएं किसी भी दुश्मन को डराने के लिए काफी हैं। इस पर एक साथ 75 से ज्यादा घातक सैन्य विमान तैनात रह सकते हैं। इसमें F-18 सुपर हॉर्नेट फाइटर जेट, ई-2 हॉकआई (अर्ली वार्निंग विमान) और अत्याधुनिक रडार सिस्टम लगा है। यह जहाज वेनेजुएला के अमेरिकी ऑपरेशनों में भी अपनी ताकत दिखा चुका है।

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ट्रंप की ‘डेडलाइन’: समझौता या विनाश?

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस तैनाती के साथ ही कड़ा रुख अख्तियार किया है। उन्होंने संकेत दिया है कि अगर अगले एक महीने के भीतर ईरान के साथ कोई ठोस परमाणु समझौता नहीं हुआ, तो अंजाम भुगतने के लिए तैयार रहना होगा। ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि वे क्षेत्र में सैन्य दबाव को कम करने के मूड में नहीं हैं।

ईरान अब ‘डबल स्ट्राइक’ रेंज में

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENCOM) ने ईरान की चौतरफा घेराबंदी कर ली है। यह अरब सागर में पहले से ही स्ट्राइक रेंज में मौजूद है। अगले एक हफ्ते में यह भी मिडिल ईस्ट में मोर्चा संभाल लेगा। अमेरिकी निगरानी विमान पहले ही क्षेत्र में पहुंचकर जासूसी और कमांड कंट्रोल को मजबूत कर रहे हैं।