टीआरपी डेस्क। छत्तीसगढ़ के सरकारी विभागों में लंबित जनशिकायतों के अंबार को देखते हुए राज्य सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। नगरीय प्रशासन विभाग ने प्रदेश के सभी नगरीय निकायों, निगमों और नगर पंचायतों के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अब किसी भी जनशिकायत को 21 दिन से अधिक समय तक लंबित नहीं रखा जा सकेगा।
संचालनालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार, सभी निगम आयुक्तों और सीएमओ (CMO) को स्पष्ट कर दिया गया है कि शिकायतों का समयबद्ध निराकरण न होना शासन के प्रति जनता के भरोसे को कमजोर कर रहा है।
50% शिकायतें अब भी लंबित, सरकार ने जताई चिंता
सामान्य प्रशासन एवं जनशिकायत निवारण विभाग की हालिया समीक्षा में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, वर्तमान में लोक अर्जियों के 50 प्रतिशत से अधिक प्रकरण लंबित हैं। विशेष रूप से वे शिकायतें जो 21 दिनों की निर्धारित अवधि पार कर चुकी हैं, वे शासन के लिए गंभीर चिंता का विषय बनी हुई हैं।
साप्ताहिक समीक्षा और नोडल अधिकारियों की जवाबदेही
सरकार ने केवल निर्देश नहीं दिए हैं, बल्कि निगरानी का पूरा खाका भी तैयार किया है। सभी विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव और सचिवों को हर सप्ताह जनशिकायतों की प्रगति की समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं। विभागों में तैनात नोडल अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से रुचि लेकर लंबित मामलों को सुलझाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज होगी हर कार्रवाई
पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने डिजिटल मॉनिटरिंग को अनिवार्य कर दिया है। अब प्रत्येक शिकायत के निराकरण के बाद उसकी विस्तृत जानकारी pgportal.gov.in (केंद्रीय पोर्टल) और janshikayat.cg.nic.in (राज्य स्तरीय पोर्टल पर अपलोड करनी होगी।


