टीआरपी डेस्क। इंटरनेट की दुनिया में सुरक्षित माहौल बनाने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) द्वारा तैयार किए गए कंटेंट को लेकर संशोधित नियम आज यानी 20 फरवरी 2026 से पूरे देश में प्रभावी हो गए हैं। अब सोशल मीडिया या इंटरनेट पर किसी भी तरह का एआई जेनरेटेड कंटेंट बिना स्पष्ट लेबल के शेयर करना कानूनी रूप से भारी पड़ सकता है। आईटी मंत्रालय ने इन नियमों को IT (Digital Media Ethics Code) Rules 2021 के संशोधन के तौर पर 10 फरवरी को नोटिफाई किया था।
पीएम मोदी का बड़ा संदेश: “सोर्स स्टैंडर्ड सेट करना जरूरी”
दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित AI Impact Summit के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एआई सुरक्षा (AI Safety) पर अपनी चिंता जाहिर की। पीएम ने कहा कि डीपफेक और फेब्रिकेटेड कंटेंट समाज के लिए एक बड़ी चुनौती बन गए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि एआई कंटेंट के लिए वाटरमार्किंग और क्लियर सोर्स स्टैंडर्ड तय करना अब समय की मांग है, ताकि लोग असली और नकली के बीच अंतर समझ सकें।
क्या है सिंथेटिकली जेनरेटेड (SGI) कंटेंट?
सरकार ने पहली बार एआई कंटेंट को SGI (Synthetically Generated Content) के रूप में परिभाषित किया है। ऐसा कोई भी डिजिटल कंटेंट जिसे एआई या कंप्यूटर के माध्यम से मॉडिफाई किया गया हो और वह किसी वास्तविक व्यक्ति, घटना या स्थान जैसा दिखे, उसे SGI माना जाएगा। ऐसे कंटेंट को शेयर करने से पहले ‘एआई जेनरेटेड’ का लेबल या वाटरमार्क लगाना जरूरी होगा। सामान्य एडिटिंग (जैसे ब्राइटनेस ठीक करना या फिल्टर लगाना) को SGI नहीं माना जाएगा।
No-Go ज़ोन: इन मामलों में होगी कड़ी कार्रवाई
सरकार ने कुछ श्रेणियों को ‘रेड जोन’ में रखा है, जहां किसी भी प्रकार का एआई हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
- बच्चों से जुड़े आपत्तिजनक कंटेंट
- फर्जी दस्तावेज या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड
- हथियार और गोला-बारूद से जुड़ी भ्रामक जानकारी
- किसी की छवि खराब करने वाले डीपफेक वीडियो





