टीआरपी डेस्क। मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए नई आबकारी नीति को कैबिनेट की मंजूरी दे दी है। डिप्टी सीएम और वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने विधानसभा में इस नीति की घोषणा करते हुए साफ किया कि सरकार राजस्व बढ़ाने के साथ-साथ नियंत्रण पर भी जोर दे रही है। नई नीति के तहत प्रदेश में शराब की कीमतें 20% तक बढ़ जाएंगी और दुकानों के आवंटन की प्रक्रिया पूरी तरह बदल जाएगी।

ई-टेंडर और ई-ऑक्शन से होगा आवंटन

सरकार ने पुरानी रिन्यूअल प्रक्रिया को खत्म कर दिया है। प्रदेश की सभी 3,553 मदिरा दुकानों का आवंटन अब ई-टेंडर और ई-ऑक्शन के माध्यम से होगा। इस बार आरक्षित मूल्य (Reserve Price) में 20% की बढ़ोतरी की गई है। नीति में स्पष्ट किया गया है कि प्रदेश में कोई भी नई शराब की दुकान या अहाता नहीं खोला जाएगा।

विदेशी शराब की बॉटलिंग फीस दोगुनी

विदेशी शराब और बीयर के शौकीनों की जेब पर अतिरिक्त भार पड़ेगा। बॉटलिंग फीस 6 रुपये से बढ़ाकर 12 रुपये प्रति प्रूफ लीटर कर दी गई है। फीस 3 रुपये से बढ़ाकर 6 रुपये प्रति बल्क लीटर की गई है।

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ऑटोमेटिक अप्रूवल सिस्टम

भ्रष्टाचार और देरी को कम करने के लिए कीमतों के निर्धारण की प्रक्रिया को डिजिटल कर दिया गया है। अब ब्रांड की कीमत बढ़ाने के लिए आबकारी आयुक्त के पास फाइल नहीं भेजी जाएगी। डिस्लरी पोर्टल पर आवेदन अपलोड होते ही सिस्टम दूसरे राज्यों की दरों से मिलान करेगा और शर्तें पूरी होने पर ऑटोमेटिक अप्रूवल मिल जाएगा।

महुआ मदिरा और हेरिटेज शराब को बढ़ावा


आदिवासी समुदायों के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। आदिवासियों के स्वसहायता समूहों द्वारा निर्मित महुआ शराब को दूसरे राज्यों में ड्यूटी फ्री करने की योजना है। इसके बदले में अन्य राज्यों की हेरिटेज शराब की बिक्री भी मध्य प्रदेश में ड्यूटी फ्री रहेगी।

पुराने प्रतिबंध यथावत रहेंगे

सरकार ने स्पष्ट किया है कि कुछ धार्मिक और पर्यावरणीय पाबंदियां जारी रहेंगी: नर्मदा नदी के 5 किलोमीटर के दायरे में शराब की दुकानों पर प्रतिबंध जारी रहेगा। धार्मिक शहरों में शराब बिक्री को लेकर पुराने नियम ही लागू रहेंगे।

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