टीआरपी डेस्क। सुप्रीम कोर्ट ने NCERT की 8वीं कक्षा की पाठ्यपुस्तक में ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ से संबंधित विवादित चैप्टर को लेकर केंद्र सरकार और संस्थान को जमकर फटकार लगाई है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने इस कदम को न्यायपालिका की गरिमा कम करने की एक “कैलकुलेटिव मूव” (सोची-समझी चाल) बताया। अदालत के सख्त रुख को देखते हुए NCERT ने अब इस मामले में बिना शर्त माफी मांगने की पेशकश की है।

“81 हजार किताबें वापस लीं, लेखक ब्लैकलिस्ट होंगे”

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि बाजार में बिक चुकी 32 हजार से अधिक प्रतियों को वापस मंगा लिया गया है। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि जिन दो विशेषज्ञों ने इस विवादित चैप्टर को तैयार किया है, उन्हें भविष्य में न केवल शिक्षा मंत्रालय, बल्कि किसी भी सरकारी मंत्रालय से दोबारा कभी नहीं जोड़ा जाएगा।

“जब हम पर हमला होता है, तो हम जवाब देना जानते हैं”

सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत का गुस्सा साफ नजर आया। उन्होंने कहा, “यह केवल 8वीं क्लास की बात नहीं है। आप पूरी टीचिंग कम्युनिटी और छात्रों को सिखा रहे हैं कि ज्यूडिशियरी करप्ट है। इससे समाज में क्या मैसेज जाएगा? मुझे खुद इस किताब की एक कॉपी मिली है और इसमें जो लिखा है, वह बेहद लापरवाही भरा है।”

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CJI ने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि NCERT के डायरेक्टर ने शुरुआती जवाब में कंटेंट का बचाव करने की कोशिश की थी। उन्होंने कहा कि चैप्टर में पूर्व CJI के भाषण के अंशों को गलत संदर्भ में पेश किया गया ताकि यह लगे कि न्यायपालिका ने खुद संस्थागत भ्रष्टाचार को स्वीकार किया है।

विवादित चैप्टर में क्या था?

चैप्टर में न्यायपालिका के खिलाफ मिली शिकायतों का विशेष उल्लेख था, जिससे यह आभास होता था कि कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। इसमें लिखा गया था कि लोग न्यायपालिका के हर स्तर पर भ्रष्टाचार का अनुभव करते हैं। पेंडिंग केसों के आंकड़ों को न्यायपालिका की विफलता के रूप में पेश किया गया था।