टीआरपी डेस्क। आजकल सोशल मीडिया की लत इस कदर बढ़ गई है कि लोग सुबह आंख खुलते ही सबसे पहले अपना स्मार्टफोन ढूंढते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, व्हाट्सएप और सोशल मीडिया स्क्रॉल करने की यह आदत धीरे-धीरे लोगों को गंभीर मानसिक और शारीरिक बीमारियों की ओर धकेल रही है।
तेजी से बढ़ते इंटरनेट उपयोग के कारण युवाओं और कामकाजी लोगों में ‘डिजिटल स्ट्रेस’ के मामले बढ़ रहे हैं। सुबह के कीमती वक्त को फोन पर बर्बाद करना न केवल कार्यक्षमता घटा रहा है, बल्कि पारिवारिक संबंधों में भी दूरी पैदा कर रहा है।
दिमाग और हार्मोन पर पड़ता है सीधा दबाव
डॉक्टरों का कहना है कि सुबह का समय मस्तिष्क के लिए बहुत संवेदनशील होता है। नींद से जागने के तुरंत बाद जब हम स्क्रीन देखते हैं, तो दिमाग पर अचानक सूचनाओं का बोझ पड़ता है।
- कॉर्टिसोल हार्मोन में वृद्धि: सुबह उठते ही नकारात्मक खबरें या तनावपूर्ण संदेश पढ़ने से शरीर में कॉर्टिसोल (Cortisol) यानी स्ट्रेस हार्मोन का लेवल बढ़ जाता है। इससे व्यक्ति दिन की शुरुआत ही मानसिक तनाव के साथ करता है।
- डिजिटल स्ट्रेस: सोशल मीडिया पर दूसरों की सफलता या अच्छी फोटो देखकर मन में तुलना और हीन भावना पैदा होती है, जिसे विशेषज्ञ ‘डिजिटल स्ट्रेस’ कहते हैं।
- आंखों और नींद पर असर: फोन के अत्यधिक उपयोग से माथे में दर्द, आंखों से पानी आना और दृष्टि कमजोर होने जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। देर रात तक फोन चलाने से नींद का चक्र (Sleep Cycle) भी पूरी तरह बिगड़ चुका है।
इस आदत से कैसे पाएं छुटकारा?
विशेषज्ञों का सुझाव है कि सुबह उठने के बाद कम से कम 15 से 20 मिनट तक मोबाइल को हाथ न लगाएं।
- गहरी सांस लें: सोकर उठने के बाद कुछ मिनट शांत बैठें और ब्रीदिंग एक्सरसाइज करें।
- शारीरिक गतिविधि: फोन चलाने के बजाय हल्की स्ट्रेचिंग करें या गुनगुना पानी पिएं।
- नोटिफिकेशन बंद रखें: रात को सोते समय फोन को खुद से दूर रखें ताकि सुबह उठते ही सबसे पहले उस पर नजर न पड़े।


