रायपुर। उच्च शिक्षा विभाग से जुड़े विश्व विद्यालयों और महाविद्यालयों में खरीदी में हुए करोड़ों के घोटाले में कार्रवाई लगातार जारी है। बिलासपुर स्थित अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय में भी जेम की आड़ में खरीदी में घोटाला साबित हुआ है। इस मामले में जांच प्रतिवेदन के आधार पर क्रय समिति के 6 सदस्यों को शो कॉज नोटिस जारी किया गया है।

उच्च शिक्षा विभाग के अवर सचिव फबिओला बड़ा ने नोटिस में कहा है कि जांच प्रतिवेदन में समिति के 6 सदस्य डॉ. एच.एस. होता (विभागाध्यक्ष, कंप्यूटर साइंस), डॉ. डी.एस.वी. जी. कलाधर (विभागाध्यक्ष, माइक्रोबायोलॉजी), यशवंत कुमार पटेल (विभागाध्यक्ष, फ़ूड प्रोसेसिंग), अलेक्जेंडर कुजूर (वित्त अधिकारी, विश्वविद्यालय), और पूजा पांडे (सहायक प्राध्यापक, वाणिज्य) की भूमिका संदिग्ध पाई गई है।

नोटिस में तीन दिनों के भीतर लिखित जवाब मांगा गया है। नोटिस में यह भी कहा गया है कि इस मामले में कर्मचारियों की एक वेतन वृद्धि असंचयी प्रभाव से रोकी जा सकती है।

दो पन्नों की शिकायत पर हुआ घोटाले का खुलासा

गौरतलब है कि उच्च शिक्षा विभाग में पूरे प्रदेश के अधीन पूरे प्रदेश के उच्च शिक्षण संस्थानों में खरीदी में घोटाले की दो पन्नों की एक शिकायत उच्च शिक्षा सचिव से की गई थी। इसमें बताया गया था कि किस तरह सामग्रियों की दुगुने और तिगुने दर पर खरीदी की गई है। इस शिकायत के आधार पर समग्र संस्थानों में जांच शुरू की गई। इस दौरान उजागर होती जा रही गड़बड़ियों के आधार अब तक कई प्राचार्य और प्रोफेसर निलंबित हो चुके हैं।

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इस तह की गई गड़बड़ी

अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय बिलासपुर में 15 अप्रैल 2025 को जेम पोर्टल के माध्यम से L1 पद्धति अपनाकर लगभग 1 करोड़ रुपये से अधिक की खरीदी की गई। आरोप है कि बिना निविदा किए ही एक ही दिन में 26 क्रय आदेश तीन फर्मों सागर इंडस्ट्रीज-जांजगीर, सिंघानिया ग्रुप ऑफ़ इंडस्ट्रीज-जांजगीर और ओशन एंटरप्राइज़-जांजगीर को जारी किए गए। आशंका है कि ये सभी फर्म एक ही परिवार से जुड़ी हो सकती हैं, क्योंकि L1 दर इन्हीं फर्मों में आई है।

आरोप है कि विभाग के अधिकारियों ने संबंधित फर्मों से मिलीभगत करके और छत्तीसगढ़ भंडार क्रय नियम का खुला उल्लंघन करते हुए राज्य शासन को करोड़ों रुपये का चूना लगाया है। शिकायत में दावा किया गया है कि खरीदी गई इन सामग्रियों का बाजार में वास्तविक मूल्य 40 लाख रुपये से अधिक नहीं है, जबकि खरीदी एक करोड़ रुपये से अधिक में की गई है। इस तरह यह संगठित भ्रष्टाचार साबित होता है।

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एक ही फर्म को सभी सामग्रियों की खरीदी का ठेका कैसे?

शिकायत में यह सवाल भी उठाया गया है कि फर्नीचर, खेल सामग्री, कंप्यूटर, प्रिंटर, टीवी, एसी, माइक, स्पीकर, इंटरैक्टिव पैनल जैसी अलग-अलग प्रकृति की सभी सामग्रियों की खरीदी एक या दो फर्मों द्वारा कैसे की जा सकती है। नियमों में बंच बीड का प्रावधान होने के बावजूद, अधिकारियों ने कोटेशन पद्धति अपनाई और बिना निविदा के करोड़ों का संगठित भ्रष्टाचार किया।