0 हाईकोर्ट के आदेश बाद भी दो वर्ष से जमीन हस्तांतरित नहीं हुई एसडीएम के नाम

रायपुर। रविवार को रायपुर कलेक्टोरेट गार्डन में होली मिलन के उपलक्ष्य में न्यू स्वागत विहार के “भू एवं भवन स्वामी विकास संघ” के सदस्यों की बैठक हुई। इसमें रायपुर समेत दुर्ग, बिलासपुर एवं रायगढ़ से भी शामिल हुए। सभी ने संकल्प लिया कि न्यू स्वागत विहार में अपनी ही जमीन से वंचित स्वामित्व को हमें हर हाल में ले कर रहना है। सदस्यों ने कहा कि 16-17 सालों तक लंबी लड़ाई लड़ी। उस पर कोर्ट के आदेश के बावजूद सरकारी तंत्र हमें सिर्फ ख्वाब दिखा रहा है कि जमीन आपको मिल जाएगी, लेकिन आज भी सरकार और प्रशासन इस ओर उदासीन है ।

विकास संघ का कहना है कि स्वागत विहार के जमीन का नगर निगम और एसडीएम के नाम से नामांतरण के लिए 02 साल से इंतज़ार कर रहे है लेकिन मंत्री और अधिकारी सिर्फ आश्वासन ही दे रहे हैं, जबकि टाउन एंड कंट्री से पास ले आउट देखकर जमीन खरीदी थी लेकिन बिल्डर ने धोखाधड़ी की। सभी ने अपनी कमाई का सारा पैसा झोंक दिया, जमीन की खरीददारी के लिए कइयों ने बैंको से लोन लिया पर आज जमीन का अता-पता नहीं पर लोन को पटा रहे हैं।

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आज रविवार दिनांक 8 मार्च 2026 को न्यू स्वागत विहार के “भू एवं भवन स्वामी विकास संघ” द्वारा कलेक्ट्रेट गार्डन में होली मिलन के उपलक्ष्य में सदस्यों की एक आम सभा की गयी। बड़ी संख्या में स्वागत विहार पीड़ित न केवल रायपुर बल्कि दुर्ग, बिलासपुर एवं रायगढ़ से भी शामिल हुए, सभी सदस्यों ने एक दूसरे को ग़ुलाल का टीका लगाते हुए ये संकल्प लिया कि न्यू स्वागत विहार में अपनी ही जमीन से वंचित स्वामित्व को हमें हर हाल में ले कर रहना है। अपने न्यायपूर्ण हक़ को पाने के लिए जो भी अन्याय हम पर हो रहा है हम उसका मजबूती से सामना करेंगे इसके लिए चाहे हमें सडको पर धरणा प्रदर्शन द्वारा जनता की अदालत में क्यूँ ना जाना पड़े। हमने 16-17 सालों से ये अन्याय अपने ऊपर झेलते हुए लम्बी लड़ाई लड़ी। कभी कोर्ट कचहरी की तो कभी सरकार के मंत्रियों और अधिकारियों से गुहार लगाई।

कई साल पहले सरकार के नाक के नीचे से बिल्डिंर और सरकारी अधिकारियों ने यहाँ की ज़मीन की बिक्री में जम कर भ्रष्टाचार किया पर उसका खामियाजा आज तक निर्दोष ख़रीदारों को करना पड रहा है। कोर्ट के आदेश के बावजूद सरकारी तंत्र हमें सिर्फ ख्वाब दिखा रहा है की आपकी ज़मीन आपको मिल जाएगी और हम प्रयत्न कर रहे हैं पर अपने वेवजह के अनुचित नियम कानून में फसा कर इस प्रकरण को 16 सालों से खींचा जा रहा है।लगता है आज भी सरकार इस ओर उदासीन है और अधिकारियों को कोई ठोस निर्देश नहीं मिल रहा कि किस समय सीमा के अंदर और किस तरह इसका समाधान किया जाये ताकि पीड़ितो को न्यायपूर्ण हक मिल सके।

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