रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र में शून्यकाल के दौरान दुर्ग जिले में अफीम की खेती का मामला जोरदार तरीके से गूंजा। इस मुद्दे को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। विपक्ष ने सरकार पर अफीम की खेती को संरक्षण देने का आरोप लगाया, जबकि सरकार की ओर से पुलिस की कार्रवाई और जब्ती की जानकारी दी गई।

छत्तीसगढ़ को “अफीम का कटोरा” बनाने की शुरुआत : महंत

शून्यकाल में विपक्ष की ओर से डॉ. चरणदास महंत ने इस मामले को लेकर स्थगन प्रस्ताव पेश किया। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में धान की बजाय अफीम की खेती को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है। महंत ने कहा कि छत्तीसगढ़ को “धान का कटोरा” कहा जाता है, लेकिन अब इसे “अफीम का कटोरा” बनाने की शुरुआत हो चुकी है।

सीबीआई जांच की मांग

महंत ने यह भी आरोप लगाया कि दुर्ग जिले में कथित तौर पर सामूहिक संरक्षण के तहत अफीम की खेती कराई गई। उन्होंने कहा कि इस मामले की निष्पक्ष जांच के लिए या तो सीबीआई से जांच कराई जाए या फिर विधायकों की एक समिति बनाकर पूरे प्रकरण की जांच कराई जाए।

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चंद्राकर ने कांग्रेस पर साधा निशाना

वहीं सत्ता पक्ष की ओर से अजय चंद्राकर ने पलटवार करते हुए कांग्रेस पर ही संरक्षण देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विपक्ष इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रहा है।

एफआईआर में विनायक ताम्रकार का नाम नहीं होने का आरोप

इस दौरान भूपेश बघेल ने भी हस्तक्षेप करते हुए एफआईआर की कॉपी का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि एफआईआर में विनायक ताम्रकार का नाम नहीं है, बल्कि उनके नौकर का नाम दर्ज है। वहीं कलेक्टर की ओर से मुख्य आरोपी के रूप में विनायक ताम्रकार का नाम सामने आने की बात कही जा रही है, जिससे मामले में भ्रम की स्थिति बन रही है।

अफीम की खेती के मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस के कारण सदन का माहौल कुछ समय के लिए काफी गरमा गया। दोनों पक्षों के विधायक एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाते नजर आए।

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गृह मंत्री ने पूरे मामले की दी जानकारी

इस पूरे मामले पर सरकार की ओर से जवाब देते हुए विजय शर्मा ने कहा कि 6 मार्च 2026 को दुर्ग पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि समोदा गांव में अवैध रूप से अफीम की खेती की जा रही है। उन्होंने बताया कि सूचना के आधार पर छत्तीसगढ़ पुलिस ने थाना पुलगांव क्षेत्र में रेड की कार्रवाई की। छापेमारी के दौरान अंधेरा होने के कारण फसल को सुरक्षित रखा गया और आगे की कार्रवाई की गई।

‘6000 किलो अफीम बरामद’

गृहमंत्री ने जानकारी दी कि इस मामले में उसी दिन तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। कार्रवाई के दौरान करीब 6 हजार 224 किलोग्राम अवैध अफीम बरामद की गई, जिसकी बाजार कीमत 7 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है।

सरकार का कहना है कि मामले में कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जा रही है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। वहीं विपक्ष इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग पर अड़ा हुआ है, जिसके चलते आने वाले दिनों में यह मुद्दा और भी अधिक गहराने की आशंका है।

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