टीआरपी डेस्क। Commercial LPG Gas Shortage: देश के बड़े महानगरों से एक बेहद डराने वाली खबर सामने आ रही है, जिसका सीधा असर अब आपके शहर रायपुर की गलियों और जायके पर पड़ने वाला है। दरअसल, बेंगलुरु में आज से होटल और रेस्तरां पूरी तरह बंद कर दिए गए हैं। महाराष्ट्र और कर्नाटक के रेस्टोरेंट एसोसिएशन ने भी सरकार को दो-टूक चेतावनी दे दी है कि अगर सप्लाई तुरंत बहाल नहीं हुई, तो आने वाले कुछ ही दिनों में खाने की तमाम दुकानें बंद हो सकती हैं।
मिडिल ईस्ट का युद्ध और आपकी रसोई का बजट
दरअसल संकट के तार सात समंदर पार चल रहे युद्ध से जुड़े हैं। ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद मिडिल ईस्ट में जो संघर्ष छिड़ा है, उसने ग्लोबल सप्लाई चेन की कमर तोड़ दी है। आलम यह है कि बड़े-बड़े शहरों में होटल और रेस्टोरेंट संचालक कुकिंग गैस पाने के लिए दर-दर भटक रहे हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, केंद्र सरकार ने एलपीजी कंपनियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि फिलहाल 19 किलो, 47.5 किलो और 425 किलोग्राम वाले भारी-भरकम कमर्शियल सिलिंडरों की रिफिलिंग पूरी तरह रोक दी जाए।
रायपुर में रेस्टोरेंट्स की लंबी कतार और सप्लाई के कड़े नियम
अब सवाल यह उठता है कि अगर यह युद्ध ऐसे ही चलता रहा, तो रायपुर का क्या होगा? बता दें कि रायपुर में रेस्टोरेंट्स और कैफे की संख्या पिछले कुछ सालों में तेजी से बढ़ी है। तेलीबांधा मरीन ड्राइव से लेकर वीआईपी रोड तक फैले इस ‘फूड हब’ में रोजाना हजारों कमर्शियल सिलेंडर की खपत होती है। पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश और झारखंड जैसे राज्यों में तो पहले ही पाबंदियां लगा दी गई हैं। अगर रायपुर में भी सप्लाई इसी तरह बाधित हुई, तो शहर के 500 से ज्यादा छोटे-बड़े रेस्टोरेंट पर ताले लटक सकते हैं।
गैस श्मशान घाटों पर भी संकट, बदले गए घरेलू गैस के नियम
सिर्फ कमर्शियल ही नहीं, बल्कि प्रोपेन और ब्यूटेन जैसे गैस पार्ट्स के इस्तेमाल पर रोक लगने के बाद देश के कुछ राज्यों में गैस श्मशान घाटों को भी कुछ समय के लिए बंद करना पड़ा है। वहीं, आम जनता के लिए भी नियम अब पहले जैसे नहीं रहे। अब कोई भी कस्टमर पिछली डिलीवरी के 21-25 दिन बाद ही नया घरेलू सिलेंडर बुक कर पाएगा। यानी अब रायपुर की गृहिणियों को भी अपनी रसोई का बजट और गैस का इस्तेमाल बहुत सोच-समझकर करना होगा।
क्या अब फिर से चूल्हे पर लौटेगा छत्तीसगढ़?
प्रशासनिक सूत्रों की मानें तो अगर युद्ध लंबा खिंचा और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सप्लाई नहीं सुधरी, तो आने वाले दिनों में रायपुर के होटलों में मिलने वाली थाली के दाम 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ सकते हैं। फिलहाल जिला प्रशासन और गैस एजेंसियां स्टॉक की निगरानी कर रही हैं, लेकिन जिस तरह बेंगलुरु में शटर गिरे हैं, उसने रायपुर के व्यापारियों और आम जनता की धड़कनें बढ़ा दी हैं। अब देखना होगा कि केंद्र सरकार इस संकट से निपटने के लिए क्या नया रास्ता निकालती है।



