रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के प्रश्नकाल के दौरान प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी और चिकित्सकों के संलग्नीकरण (अटैचमेंट) का मुद्दा जोरदार तरीके से उठा। इस दौरान स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने सदन में बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी), प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) और जिला अस्पतालों से की गई चिकित्सकों की प्रतिनियुक्ति और संलग्नीकरण को रद्द किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल अत्यंत आवश्यक परिस्थितियों में ही कुछ मामलों में प्रतिनियुक्ति जारी रखी जाएगी।
दरअसल यह मुद्दा भाजपा विधायक प्रबोध मिंज ने सदन में उठाया। उन्होंने सरगुजा जिले के प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों के रिक्त पदों की स्थिति पर सरकार से जवाब मांगा। विधायक मिंज ने पूछा कि जिले में कुल कितने पद खाली हैं और इन्हें कब तक भरा जाएगा। उन्होंने कहा कि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी के कारण मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
विधायक प्रबोध मिंज ने यह भी कहा कि कई बार ऐसा देखा जाता है कि अस्पतालों में नियुक्त डॉक्टरों को अन्य स्थानों पर संलग्न कर दिया जाता है। इससे मूल स्वास्थ्य केंद्रों में चिकित्सकों की कमी और बढ़ जाती है, जिससे वहां की स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होती हैं। उन्होंने सरकार से इस व्यवस्था पर स्पष्ट नीति बनाने की मांग की।
इस सवाल के जवाब में स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि प्रदेश में डॉक्टरों की भर्ती दो स्तरों पर होती है। एक भर्ती प्रक्रिया राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के माध्यम से और दूसरी राज्य सरकार के माध्यम से संचालित की जाती है। उन्होंने बताया कि फिलहाल 525 पदों पर भर्ती की प्रक्रिया जारी है और इसे जल्द पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है।



