धार्मिक डेस्क। हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को ‘पापमोचनी एकादशी’ कहा जाता है। जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है पाप को मोचन (नष्ट) करने वाली। मान्यताओं के अनुसार, जो व्यक्ति इस दिन पूरी श्रद्धा से भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करता है, उसके जाने-अनजाने में किए गए सभी पाप नष्ट हो जाते हैं।
पापमोचनी एकादशी की पौराणिक कथा (papmochani ekadashi vrat katha)
प्राचीन काल में चैत्ररथ नामक एक सुंदर वन था, जहां मेधावी ऋषि कठिन तपस्या कर रहे थे। उनकी तपस्या को भंग करने के लिए इंद्रदेव ने मंजुघोषा नामक एक अप्सरा को भेजा। मंजुघोषा के सौंदर्य और गायन से ऋषि मोहित हो गए और अपनी तपस्या भूलकर कई सालों तक उसके साथ रहे।
जब ऋषि को अपनी भूल का अहसास हुआ और उन्हें पता चला कि उनकी तपस्या नष्ट हो गई है, तो उन्होंने क्रोध में आकर मंजुघोषा को पिशाचनी बनने का श्राप दे दिया। अप्सरा ने रोते हुए क्षमा मांगी, तब ऋषि ने उसे प्रायश्चित के लिए पापमोचनी एकादशी का व्रत करने का विधान बताया।
ऋषि ने खुद भी च्यवन ऋषि के आदेशानुसार इस व्रत को किया। व्रत के प्रभाव से ऋषि का तेज वापस आ गया और मंजुघोषा भी पिशाच योनि से मुक्त होकर पुनः स्वर्ग लोक को चली गई।
कब है पापमोचनी एकादशी 2026?
इस वर्ष चैत्र कृष्ण एकादशी की तिथि को लेकर श्रद्धालु ध्यान दें।
एकादशी तिथि प्रारंभ: 14 मार्च 2026, सुबह 08:11 बजे से।
एकादशी तिथि समाप्त: 15 मार्च 2026, सुबह 09:20 बजे तक।
व्रत का पालन: उदयातिथि के अनुसार 15 मार्च को व्रत रखना उत्तम रहेगा।
व्रत के नियम और लाभ
सात्विकता: इस दिन पूरी तरह सात्विक रहें और मन में किसी के प्रति द्वेष न रखें।
पूजा विधि: भगवान विष्णु के ‘चतुर्भुज’ रूप की पूजा करें और पीले फूल व फल अर्पित करें।
दान का महत्व: खरमास का समय होने के कारण इस एकादशी पर दान करने का फल कई गुना बढ़ जाता है।
पाप मुक्ति: ब्रह्म हत्या या चोरी जैसे अनजाने अपराधों के मानसिक बोझ से मुक्ति के लिए यह व्रत सर्वश्रेष्ठ माना गया है।



