बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने राज्य में फायर ब्रिगेड की कमी और सुरक्षा मानकों की अनदेखी को लेकर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने शासन को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है कि, नगर निगमों और सार्वजनिक स्थानों पर दमकल वाहनों व जरूरी उपकरणों की उपलब्धता क्यों सुनिश्चित नहीं की जा रही है, जो नागरिकों की सुरक्षा के लिए अनिवार्य है।
कोर्ट ने प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में आगजनी की बढ़ती घटनाओं और नगर निगमों में फायर ब्रिगेड की अपर्याप्तता का स्वतः संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका के तौर पर सुनवाई शुरू की है। इसमें राज्य सरकार, संबंधित नगर निगमों और आला अधिकारियों को नोटिस जारी कर फायर ब्रिगेड के पद, वाहन और जरूरी सुरक्षा उपकरणों के मौजूदा स्टेटस रिपोर्ट मांगी गई है।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक स्थलों और रिहायशी इलाकों में अग्निशमन व्यवस्था को लेकर नियम सख्त हैं, जिनका पालन न होना गंभीर लापरवाही है। इस मामले में अब शासन को हलफनामा दाखिल कर बताना होगा कि कब तक सभी शहरों में पर्याप्त दमकल केंद्र स्थापित कर दिए जाएंगे।
दमकलों के अधिकांश स्टाफ अर्ध कुशल
प्रदेश के अधिकांश शहरों में आए दिन आग लगने की घटनाएं सामने आती रहती हैं, लेकिन आग से निपटने वाला दमकल विभाग स्टाफ की कमी से जूझ रहा है। वहीं जो स्टाफ है उसमें से आधे से ज्यादा स्टाफ पूरी तरह प्रशिक्षित भी नहीं है, जिसका खामियाजा जान-माल को होता है। उदाहरण के तौर पर बिलासपुर जिले में 40 लोगों का स्टाफ है, इनमें से आधे से ज्यादा स्टाफ अर्ध प्रशिक्षित है। इसके अलावा फायर ब्रिगेड वाहन के चालक भी सिर्फ 9 ही हैं। ऐसे में जब कभी एक से अधिक जगहों में आग लगने की घटनाएं सामने आती हैं तो ज्यादातर स्टाफ को ओवर ड्यूटी करनी पड़ती है। फायर बिग्रेड टीम के साथ सबसे बड़ी मुश्किल ये है कि उनके पास एक भी हाइड्रोलिक वाहन नहीं है। इस कारण ऊंची इमारतों में आग की घटना घटने पर आग पर कापू करना मुश्किल हो जाता है।
गौरतलब है कि गर्मी की शुरुआत होते ही प्रदेश भर में आग लगने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। हाल की घटनाओं में कुछ मौतें भी हुई हैं, जिन्हें हाई कोर्ट ने गंभीरता से लिया है।


