टीआरपी डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज लोकसभा में मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) में जारी युद्ध को लेकर देश के सामने आ रही चुनौतियों पर विस्तार से बात की। पीएम ने साफ लफ्जों में कहा कि यह संकट सिर्फ मानवीय नहीं, बल्कि भारत की आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी एक बड़ी चुनौती है। हालांकि, उन्होंने देश को आश्वस्त किया कि सरकार हर मोर्चे पर सतर्क है।
दरअसल, मिडिल ईस्ट का इलाका भारत की ऊर्जा जरूरतों (तेल और गैस) के लिए लाइफलाइन है। हॉर्मुज स्ट्रेट, जहां से भारत का कच्चा तेल और फर्टिलाइजर आता है, वहां युद्ध के कारण जहाजों की आवाजाही चुनौतीपूर्ण हो गई है। बावजूद इसके, पीएम ने भरोसा दिलाया कि पेट्रोल-डीजल और गैस की सप्लाई प्रभावित नहीं होने दी जाएगी।
भारत ने पिछले 11 सालों में दूरदर्शिता दिखाते हुए जो तैयारी की थी, वह आज काम आ रही है। पीएम मोदी ने बताया कि भारत के पास 53 लाख मीट्रिक टन का स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व तैयार है। पेट्रोल में 20% इथेनॉल मिलाने की वजह से हर साल 4.5 करोड़ बैरल कम तेल आयात करना पड़ रहा है। पिछले एक दशक में भारत ने अपनी रिफाइनिंग क्षमता में जबरदस्त इजाफा किया है।
3.75 लाख भारतीयों की घर वापसी
पीएम ने बताया कि युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक 3 लाख 75 हजार से अधिक भारतीयों को सुरक्षित वापस लाया जा चुका है। उन्होंने खुद पश्चिम एशिया के राष्ट्राध्यक्षों से दो बार फोन पर बात की है, जिन्होंने भारतीयों की सुरक्षा का पूरा आश्वासन दिया है। दुर्भाग्य से, इस दौरान कुछ भारतीयों की मृत्यु भी हुई है, जिनके परिवारों को सरकार हरसंभव मदद दे रही है।
खेती और बिजली पर असर
बता दें कि गर्मी का मौसम शुरू हो रहा है और बिजली की डिमांड बढ़ेगी। पीएम ने जानकारी दी कि देश के पावर प्लांट्स में कोयले का पर्याप्त स्टॉक है और भारत ने लगातार दूसरे साल 100 करोड़ टन कोयला उत्पादन का रिकॉर्ड बनाया है। साथ ही, खरीफ सीजन की बुआई के लिए खाद की भी पर्याप्त व्यवस्था कर ली गई है।



