A symbolic view of gold jewelry and gleaming coins.
New prices for gold and silver are determined amidst the daily fluctuations in the bullion market.

टीआरपी डेस्क। दुनिया भर में जारी भू-राजनीतिक तनाव और मिडिल ईस्ट में गहराते युद्ध के संकट ने ग्लोबल मार्केट में खलबली मचा दी है। आमतौर पर युद्ध के समय सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने और चांदी में इस बार उल्टा रुख देखने को मिल रहा है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर पिछले 25 दिनों में दोनों कीमती धातुओं की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे निवेशकों को अरबों का नुकसान हुआ है।

28 फरवरी से अब तक: कीमतों का गणित

फरवरी के अंत से लेकर आज 25 मार्च 2026 तक की तुलना करें तो बाजार का हाल कुछ इस प्रकार है। 28 फरवरी को MCX पर सोना करीब ₹1,61,720 प्रति 10 ग्राम के आसपास था। आज यह गिरकर ₹1,37,900 – ₹1,42,000 के दायरे में आ गया है। यानी महज 25 दिनों में सोने के दाम में ₹23,000 से ज्यादा की बड़ी गिरावट आई है। अपने सर्वकालिक उच्च स्तर (High) से सोना अब तक करीब ₹54,000 सस्ता हो चुका है।

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चांदी की स्थिति और भी ज्यादा चिंताजनक है। 28 फरवरी को चांदी ₹2,85,000 प्रति किलो पर स्थिर थी, जो अब गिरकर ₹2,11,000 – ₹2,35,000 के स्तर पर आ गई है। चांदी अपने पीक से अब तक ₹2 लाख से भी ज्यादा टूट चुकी है।

युद्ध के बावजूद क्यों गिर रहे हैं दाम?

आमतौर पर युद्ध के समय सोने के दाम बढ़ते हैं, लेकिन इस बार गिरावट के पीछे 3 मुख्य ‘ट्रिगर’ हैं। युद्ध के कारण दुनिया भर के निवेशक सोने के बजाय अमेरिकी डॉलर को सबसे सुरक्षित मान रहे हैं। डॉलर इंडेक्स में उछाल की वजह से सोने की मांग वैश्विक स्तर पर कम हुई है। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने महंगाई (Inflation) की चिंता बढ़ा दी है। इस कारण केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों में कटौती की संभावना कम हो गई है, जिससे सोने जैसी गैर-ब्याज वाली संपत्तियों से निवेशक पैसा निकाल रहे हैं।

शेयर बाजारों में आई भारी गिरावट के कारण संस्थागत निवेशकों (FIIs) को नकदी की जरूरत है। इस घाटे की भरपाई के लिए वे सोने-चांदी में अपनी पोजीशन बेचकर पैसा निकाल रहे हैं।

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निवेशकों के लिए क्या है संकेत?

दरअसल, बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक मिडिल ईस्ट में तनाव कम नहीं होता और कच्चे तेल की कीमतें स्थिर नहीं होतीं, तब तक बुलियन मार्केट में यह अस्थिरता बनी रहेगी। हालांकि, लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह ‘गिरावट में खरीदारी’ (Buy on Dip) का एक सुनहरा मौका भी हो सकता है।