टीआरपी। रायपुर नगर पालिक निगम की 30 मार्च को होने वाली बजट सत्र की सामान्य सभा से पहले सभापति सूर्यकान्त राठौड़ ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। उन्होंने अपने कक्ष में सत्ता पक्ष (भाजपा), प्रतिपक्ष (कांग्रेस) और निर्दलीय पार्षदों की पृथक-पृथक बैठकें लेकर सदन के सुचारू संचालन के लिए सभी से सहयोग मांगा।
लंबे समय बाद हो रही इस सामान्य सभा में जनता से जुड़े कई अहम मुद्दे और शहर का बजट पेश होना है। सभापति की इस पहल का उद्देश्य सदन में हंगामे को कम करना और जनहित के मुद्दों पर सार्थक चर्चा के लिए समय सुनिश्चित करना है, जिससे रायपुर के विकास कार्यों को गति मिल सके।
“व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप से बचें पार्षद”: सभापति की दोटूक
बैठक के दौरान सभापति सूर्यकान्त राठौड़ ने पार्षदों को कड़ा सुझाव दिया कि वे सदन की गरिमा बनाए रखें। उन्होंने कहा कि पार्षद एक-दूसरे पर व्यक्तिगत टीका-टिप्पणी न करें। यदि किसी पार्षद पर व्यक्तिगत आरोप लगते हैं, तो वे स्वयं जवाब देने के बजाय उसे महापौर या संबंधित विभाग के अध्यक्ष पर छोड़ दें, क्योंकि वे जवाब देने में सक्षम हैं।
सभापति ने जोर देकर कहा कि काफी समय बाद सभा हो रही है, इसलिए पार्षद नगर हित में खुलकर चर्चा करें लेकिन समय बर्बाद न करें। नागरिकों के कल्याण के लिए समय का सदुपयोग करना प्राथमिकता होनी चाहिए।
सत्ता पक्ष और विपक्ष ने दिया सहयोग का आश्वासन
भाजपा पार्षदों की बैठक में महापौर मीनल चौबे विशेष रूप से उपस्थित रहीं। इसके साथ ही एमआईसी सदस्य और जोन अध्यक्षों ने भी अपनी बात रखी। कांग्रेस और निर्दलीय पार्षदों ने भी सभापति के साथ अलग से चर्चा की और सदन की कार्यवाही को गरिमामय तरीके से संचालित करने में पूर्ण सहयोग देने का आश्वासन दिया।
सर्वदलीय बैठक: भाजपा, कांग्रेस और निर्दलीय पार्षदों के साथ अलग-अलग चर्चा।
महापौर की उपस्थिति: सत्ता पक्ष की बैठक में महापौर मीनल चौबे रहीं मौजूद।
अनुशासन की अपील: व्यक्तिगत छींटाकशी से बचने और जनहित के मुद्दों पर फोकस करने का सुझाव।
लक्ष्य: 30 मार्च की बजट सभा का सफल और शांतिपूर्ण संचालन।
सभापति की इस कवायद के बाद अब देखना होगा कि 30 मार्च को बजट सत्र के दौरान सदन का माहौल कैसा रहता है। यदि पार्षदों ने इस ‘शांति समझौते’ का पालन किया, तो रायपुर को एक बेहतर और चर्चा-आधारित बजट मिल सकेगा।


