रायपुर। महतारी वंदन योजना लागू होने के बाद से सरकार ने पहली बार ऐसा आदेश दिया है। जिसके तहत सभी लाभार्थी महिलाओं को सीएससी सेंटरों में जाकर बायोमीट्रिक पहचान साबित करनी होगी। इससे यह पता चलेगा कि लाभार्थियों में कितने जीवित और पात्र हैं।

भाजपा के लिए गेमचेंजर साबित हुई इस योजना में कड़ाई नहीं की गई थी। जो भी पात्रता के मापदंड थे, उसके हिसाब से महिलाओं का सत्यापन नहीं हुआ। महिला एवं बाल विकास विभाग ने फिल्टर करने के लिए कोई मैकेनिज्म नहीं बनाया।

अपात्रों की छंटाई के लिए बनाया गया सख्त मैकेनिज्म

गौरतलब है कि मात्री वंदन योजना में अपात्रों की छंटाई की कोई व्यवस्था ही नहीं की गई। मार्च 2024 से लागू योजना में केवल आधार कार्ड और उससे लिंक्ड एकाउंट देने पर ही पंजीयन हो गया। कई महिलाओं ने तो आधार लिंक भी नहीं कराया। एकाउंट नंबर भी गलत दिए गए। वैवाहिक स्थिति की जानकारी भी गलत दी गई। धीरे-धीरे ऐसे हितग्राहियों को डाटाबेस से फिल्टर किया जा रहा है।

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30 जून तक बायोमीट्रिक पहचान अनिवार्य

इस तरह एक अप्रैल से 30 जून के बीच सभी महिलाओं को सीएससी सेंटर में पहुंचकर बायोमीट्रिक पहचान दर्ज करानी होगी। सरकार देखना चाहती है कि जिस महिला को जिस जगह पर लाभ दिया जा रहा है, वह उस स्थान पर मौजूद है या नहीं। इसके पहले मोबाइल नंबर, नाम और आधार कार्ड में अंतर मिलने पर पेमेंट होल्ड किया जा रहा है।

थंब लगाकर होगा वेरीफिकेशन

सरकार ने आदेश दिया है कि हर महिला को सीएससी केंद्र में जाकर उपस्थिति देनी होगी। महिला एवं बाल विकास विभाग और सीएससी के डिस्ट्रिक्ट मैनेजर को कोऑर्डिनेट करने का आदेश दिया गया है। वहां बायोमीट्रिक डिवाइस में थंब लगाकर अपनी पहचान साबित करनी होगी। डाटाबेस में दर्ज नाम से क्रॉस वेरीफाई किया जाएगा। जिसके नाम और पहचान में अंतर मिलेगा, उसका भुगतान होल्ड हो जाएगा। वेरीफिकेशन के लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

देखें आदेश :