टीआरपी। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में नगर निगम की सामान्य सभा शुरू होते ही बीजेपी और कांग्रेस पार्षदों के बीच पिछले बजट और पुराने कार्यकाल को लेकर जबरदस्त नारेबाजी और हंगामा हुआ। इस सियासी टकराव के कारण सदन की कार्यवाही में काफी देर तक गतिरोध बना रहा और दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर तीखे आरोप लगाए।
रायपुर नगर निगम का यह बजट सत्र शहर के विकास कार्यों और बुनियादी सुविधाओं की दिशा तय करेगा। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच इस गतिरोध का सीधा असर निगम के प्रशासनिक फैसलों और लंबित विकास परियोजनाओं की मंजूरी पर पड़ सकता है।
हंगामे के बीच शुरू हुई सदन की कार्यवाही
बैठक की शुरुआत होते ही मेयर मीनल चौबे और सभापति सूर्यकांत राठौर की मौजूदगी में कांग्रेस पार्षदों ने पिछले साल के बजट आवंटन पर सवाल उठाते हुए प्रदर्शन शुरू कर दिया। इसके जवाब में बीजेपी पार्षदों ने “कांग्रेस के 15 साल का हिसाब दो” के नारे लगाकर सदन का माहौल गरमा दिया। सत्ता पक्ष ने विपक्ष के व्यवहार पर आपत्ति जताते हुए सभापति से कड़ी कार्रवाई की मांग की।
इस तनावपूर्ण स्थिति के दौरान सूर्यकांत राठौर ने दोनों पक्षों को शांत कराने और सदन की मर्यादा बनाए रखने की लगातार कोशिश की। हालांकि, शोर-शराबे के बीच ही निगम की कार्यवाही को आगे बढ़ाया गया।
प्रश्नकाल और बजट पर चर्चा
भारी हंगामे के बावजूद, सभापति के निर्देश पर प्रश्नकाल शुरू किया गया। अधिकारियों के अनुसार यह सत्र करीब एक घंटे तक चलने की संभावना है, जिसमें पार्षदों के वार्ड संबंधी सवालों के जवाब दिए जाएंगे। प्रश्नकाल समाप्त होने के तुरंत बाद मुख्य बजट पर विस्तृत चर्चा शुरू की जाएगी, जिसमें शहर के बुनियादी ढांचे के लिए नई घोषणाएं होने की उम्मीद है।
बजट सत्र से पहले 1 घंटे का प्रश्नकाल निर्धारित किया गया है।
विवाद का मुख्य केंद्र पिछले 15 वर्षों के कार्यकाल का लेखा-जोखा और पिछला बजट रहा।
फिलहाल सदन में प्रश्नकाल जारी है। यदि हंगामा शांत नहीं हुआ तो बजट सत्र की कार्यवाही को स्थगित करना पड़ सकता है, हालांकि प्रशासन बजट पर चर्चा पूरी करने की कोशिश में है।



