बिलासपुर। राज्य सरकार के नए आबकारी नीति को चुनौती देते हुए लगाई गई याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट जस्टिस नरेश चंद्रवंशी की कोर्ट ने स्टे वाले आवेदन को रद्द कर दिया है। हाईकोर्ट ने शासन की पॉलिसी में किसी भी प्रकार की कोई त्रुटि नहीं पाया। साथ ही याचिका में प्लास्टिक की बोतल से स्वास्थ्य को नुकसान होने का जिक्र किया गया था उसमें हाईकोर्ट ने शासन से दो सप्ताह में जवाब मांगा है।
दरअसल, ऋषि इंटरप्राइजेज ने शासन की नई आबकारी नीति के खिलाफ याचिका दायर कर प्लास्टिक बॉटलिंग पर सवाल उठाया था, साथ ही इस पॉलिसी पर रोक लगाने की मांग की थी। याचिकाकर्ता ने इस पॉलिसी को लोगों के स्वास्थ्य को हानि होने का तर्क दिया था। अब मामले में दो सप्ताह बाद फिर सुनवाई होगी।
सरकार ने प्लास्टिक बोतलों का फैसला 3 माह टाला
सरकार ने एक अप्रैल से प्रदेश की सभी सरकारी शराब दुकानों में कांच की जगह प्लास्टिक बोतलों में शराब बेचने का फैसला तो लिया था, लेकिन अब तीन माह की वृद्धि की गई है। शराब कंपनियों को कांच की बोतल में शराब का स्टाक खत्म करने के लिए समय दिया गया है।
आबकारी विभाग के मुताबिक प्लास्टिक की बोतल में शराब की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कंपनियों को तीन महीने का समय दिया गया है ताकि वो कांच की बोतल का स्टाक खत्म कर सके। हालांकि बोतल के व्यवसाय से जुड़े लोग सरकार के फैसले का विरोध कर रहे हैं। दूसरी तरफ, सरकार का कहना है कि इस फैसले का उद्देश्य शराब की पैकेजिंग और परिवहन व्यवस्था को अधिक सुरक्षित और सुगम बनाना है। कांच की बोतलों के टूटने से होने वाले नुकसान और हादसों को रोकने के साथ-साथ सप्लाई चेन को बेहतर करने के लिए यह कदम उठाया गया है।
नई नीति के तहत प्रदेशभर की सैकड़ों दुकानों में प्लास्टिक बोतलों की आपूर्ति शुरू कर दी गई है। वहीं, बोतलबंदी इकाइयों को भी पहले ही नई पैकेजिंग व्यवस्था के अनुरूप उत्पादन करने के निर्देश दिए जा चुके हैं। हालांकि, इस बदलाव को लेकर पर्यावरणविदों ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि प्लास्टिक के उपयोग में वृद्धि से कचरा प्रबंधन की चुनौती बढ़ सकती है। इस पर सरकार का दावा है कि प्लास्टिक बोतलों के संग्रह और रीसाइक्लिंग के लिए अलग से व्यवस्था की जाएगी।


