टीआरपी डेस्क। दिल्ली की एक विशेष अदालत ने मध्य प्रदेश कांग्रेस के विधायक राजेंद्र भारती और बैंक के एक पूर्व कर्मचारी को धोखाधड़ी के पुराने मामले में तीन साल के कारावास की सजा सुनाई है। यह पूरा मामला साल 1998 से 2011 के बीच अवैध तरीके से ब्याज भुगतान प्राप्त करने और बैंक रिकॉर्ड में बड़े पैमाने पर हेराफेरी करने से जुड़ा हुआ है।
एक लाख रुपये का जुर्माना और साजिश का दोष
स्पेशल जज दिग्विजय ने इस मामले में विधायक राजेंद्र भारती और बैंक के पूर्व कैशियर रघुवीर शरण प्रजापति को दोषी पाया है। अदालत ने दोनों दोषियों पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने इन्हें आपराधिक साजिश रचने, धोखाधड़ी करने और जाली दस्तावेजों को असली के तौर पर इस्तेमाल करने जैसे गंभीर अपराधों के लिए दंडित किया है।
कोर्ट से मिली तुरंत जमानत और अपील का समय
बता दें कि सजा सुनाए जाने के तुरंत बाद अदालत ने दोनों दोषियों को राहत भी प्रदान की है। कोर्ट ने राजेंद्र भारती और रघुवीर शरण को 50,000 रुपये के निजी मुचलके पर जमानत दे दी है। इसके साथ ही दोनों को हाईकोर्ट में इस फैसले के खिलाफ अपील दायर करने के लिए 30 दिनों का समय दिया गया है। फिलहाल इस मामले में अदालत के विस्तृत लिखित आदेश का इंतजार किया जा रहा है।
क्या था पूरा मामला?
दरअसल, यह कानूनी विवाद दशकों पुराना है। आरोप था कि 1998 और 2011 के बीच बैंक के तत्कालीन कैशियर के साथ मिलीभगत कर सरकारी नियमों को ताक पर रखकर अवैध रूप से ब्याज का लाभ उठाया गया था। जांच के दौरान बैंक रिकॉर्ड में छेड़छाड़ के पुख्ता सबूत मिलने के बाद सीबीआई और अन्य जांच एजेंसियों ने चार्जशीट पेश की थी। मैदानी सूत्रों का कहना है कि विधायक राजेंद्र भारती के लिए यह फैसला एक बड़ा राजनीतिक झटका साबित हो सकता है।


