छत्तीसगढ़ महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक ने रायपुर में 392वीं जनसुनवाई की

टीआरपी। छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डाॅ. किरणमयी नायक ने बुधवार को रायपुर में 392वीं जनसुनवाई की। इस दौरान महिला उत्पीड़न से संबंधित रायपुर जिले के 181वें चरण के प्रकरणों पर सुनवाई हुई। आयोग ने एक पुलिस आरक्षक द्वारा अपनी पत्नी को भरण-पोषण न देने पर कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए उसकी सेवा समाप्ति (Termination) की अनुशंसा करने के निर्देश दिए हैं।

यह जनसुनवाई सरकारी तंत्र में काम करने वाली महिलाओं और पारिवारिक प्रताड़ना की शिकार महिलाओं के लिए एक बड़ी उम्मीद है। आयोग द्वारा पुलिस विभाग और शिक्षा विभाग के अधिकारियों के खिलाफ सख्त निर्देश यह संदेश देते हैं कि पद और रसूख का इस्तेमाल कर महिलाओं का उत्पीड़न बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

केस 1: आरक्षक का रसूख नहीं आया काम, नौकरी जाने की नौबत
तेलीबांधा थाने में पदस्थ एक आरक्षक ने आयोग के समक्ष स्वीकार किया था कि वह अपनी पत्नी को 15 हजार रुपये प्रतिमाह देगा, लेकिन उसने एक पैसा नहीं दिया। डॉ. किरणमयी नायक ने सख्त निर्देश दिए कि यदि वह जुलाई 2025 से अब तक का बकाया भुगतान नहीं करता, तो डीजीपी (DGP) को पत्र लिखकर उसकी सेवा समाप्ति की अनुशंसा की जाएगी।

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केस 2: मातृत्व अवकाश और वेतन का मामला
एक आवेदिका, जो छत्तीसगढ़ राज्य लघु वन उपज संघ में सीनियर एक्जीक्यूटिव है, का मातृत्व अवकाश के बाद वेतन रोक दिया गया है। आयोग ने इस मामले में विभाग के उच्चाधिकारियों को पक्षकार बनाने का निर्देश दिया है ताकि संविदा नियुक्ति के नवीनीकरण और वेतन भुगतान का समाधान हो सके।

केस 3: कार्यस्थल पर प्रताड़ना, दुर्ग SP करेंगे जांच
धमधा थाना की एक महिला कर्मचारी ने अपने उच्चाधिकारी पर गर्भपात (Abortion) जैसी नाजुक स्थिति में भी ड्यूटी के लिए मजबूर करने और अभद्र भाषा के प्रयोग का आरोप लगाया है। आयोग ने एस.पी. दुर्ग को इस मामले की जांच करने और आवेदिका की ड्यूटी किसी नजदीकी थाने में लगाने के निर्देश दिए हैं।

अन्य महत्वपूर्ण फैसले:


दिव्यांग शिक्षिका को राहत: आंखों से दिव्यांग शिक्षिका को शाम 4 बजे के बाद क्लास न देने पर विभाग सहमत हुआ।

संपत्ति विवाद: पंडरी स्थित संयुक्त संपत्ति पर अवैध कब्जे के मामले में आयोग ने आवेदिका को विरोध होने पर FIR दर्ज कराने की छूट दी।

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दूसरी शादी का सपना: बच्चों से बात करने पर पता चला कि एक शिक्षक (पति) दूसरी शादी की योजना बना रहा है। आयोग ने उसे बच्चों से मिलने देने और 10 हजार रुपये गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया।

कुल जनसुनवाई: प्रदेश स्तर पर 392वीं और रायपुर में 181वीं सुनवाई।

आरक्षक का वेतन: ₹40,000 (पत्नी को ₹15,000 देने का निर्देश)।

शिक्षक का वेतन: ₹50,000 (पत्नी को ₹10,000 देने का निर्देश)।

आयोग ने दुर्ग एसपी और रायपुर कमिश्नर को संबंधित प्रकरणों में रिपोर्ट भेजने को कहा है। अगली सुनवाई में मातृत्व अवकाश से जुड़े अधिकारियों की उपस्थिति अनिवार्य की गई है। यदि आदेशों का पालन नहीं हुआ, तो आयोग सीधे अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा करेगा।