रायपुर। सरकारी निर्माण से जुड़े विभागों के ठेकेदारों के सामने निर्माण सामग्री 20 से 25 फीसदी तक महंगी हो जाने से दुविधा की स्थिति निर्मित हो गई है। इनका कहना है कि राज्य शासन द्वारा ​हालात को देखते हुए रेट रिवाइज किए जाने पर ही निर्माण कार्य पूरे हो सकेंगे, वरना निर्माण ठप करने की नौबत आ गई है।

छत्तीसगढ़ कांट्रेक्टर्स एसोसिएशन की कोर कमेटी की बैठक आज राजधानी में हुई। जिसमें सभी जिलों के पदा​धिकारी शामिल हुए। इस दौरान विस्तार से चर्चा कर निर्माण कार्य जारी रखने पर असमर्थता जताते हुए मुख्यमंत्री सहित निर्माण विभागों के मंत्री, सचिवों, प्रमुख अ​भियंता और मुख्य अभियंताओं को जल्द ज्ञापन सौंपने का फैसला लिया गया।

कांट्रेक्टर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष बीरेश शुक्ला की अध्यक्षता में यह बैठक हुई। इसमें सभी स्थानों से आए कांट्रेक्टरों ने सड़क, ब्रिज और भवन निर्माण सामग्री में तेजी से हुई बढ़ोत्तरी पर बिंदुवार चर्चा करते हुए सुझाव रखा। सभी ने कहा कि जिन निर्माण कार्यों की निविदा स्वीकृत होकर वर्कआर्डर जारी हो चुके हैं, उन्हें पूरा कराना संभव नहीं हो पा रहा है, क्योंकि प​श्चिमी देशों में युद्ध की वजह से डामर सहित लोहा, एल्युमिनियम जैसी सामग्री सबसे अ​धिक महंगी हुई है, जो कि टेंडर शर्तों के अनुसार 20 से 25 फीसदी तक ज्यादा है। ऐसे में ठेकेदार कर्ज में डूब जाएंगे फिर भी वह निर्माण पूरा नहीं हो पाएगा। इसलिए सभी ने एक सुर में राज्य सरकार के सामने टेंडर शर्तों में रेट रिवाइज किए जाने का प्रस्ताव पारित किया।

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पीक समय में बढ़ गई कीमत

एसोसिएशन के अध्यक्ष बीरेश शुक्ला ने जारी बयान में कहा कि कोर कमेटी की बैठक में सभी सरकारी निर्माण कार्यों के ठेकेदारों ने निर्माण पूरा कराने में असमर्थता जताई है। जबकि गर्मी के महीने में ही सड़कों का डामरीकरण कराने का पीक सीजन होता है। ऐसे में डामर का रेट 50 हजार से बढ़कर 84 हजार टन पहुंचने से सबसे अ​धिक प्रभावित हो रहा है। अभी भी गैस की किल्लत बनी हुई है। इससे टाइल्स कटिंग जैसे काम नहीं हो रहे हैं। वहीं निर्माण विभागों ने जारी टेंडर की तारीखों को भी आगे बढ़ाने का कदम उठाया है। कोर कमेटी में लिए गए फैसले का बिंदुवार ज्ञापन राज्य शासन को सौंपने का निर्णय लिया गया है। ताकि इस पर शासन विचार कर रेट रिवाइज करके निर्माण कार्यों को आगे बढ़ाने में ठोस कदम उठा सके, क्योंकि सभी तरह के सरकारी कार्यों के सामग्री का रेट बढ़ने से निर्माण कार्य ठप होने के कगार पर है।

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डामरीकरण के कार्य सबसे अ​धिक प्रभावित

प्रदेशभर में करोड़ों के टेंडर खराब सड़कों का मरम्मत और डामरीकरण के लिए जारी किए गए हैं। ऐसे में यह काम सबसे अ​धिक प्रभावित हो रहा है। क्योंकि डामर की किल्लत और टेंडर से 20 से 25 प्रतिशत तक बढ़ोतरी बड़ी मुसीबत के रूप में सामने है। लोहे की कीमत बढ़ने से ओवरब्रिज और अंडरब्रिज का निर्माण पूरा कराने में दिक्कत है। इन सभी ​परिस्थितियों से राज्य शासन के प्रमुख अ​धिकारियों को अवगत कराने के बाद निर्माण ठप करने जैसे कठोर कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। इस पर सभी कॉन्ट्रैक्टर्स ने अपनी सहमति व्यक्त करते हुए सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया।