नई दिल्ली। भारत सरकार ने देश में बच्चों के स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने 2 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सर्दी-खांसी की दवाओं (कफ सिरप) के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा दिया है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सिफारिशों के बाद लिए गए इस फैसले के तहत अब दवा कंपनियों को अपने उत्पादों पर अनिवार्य रूप से चेतावनी लिखनी होगी कि यह दवा छोटे बच्चों के लिए नहीं है।

दवा निर्माताओं के लिए नए निर्देश

सरकार ने ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) के माध्यम से सभी राज्यों के ड्रग कंट्रोलर्स और दवा निर्माताओं को नोटिस जारी किया है। इस निर्देश के अनुसार, फिक्स्ड डोज कॉम्बिनेशन (FDC) वाली सर्दी-खांसी की दवाओं के लेबल पर स्पष्ट रूप से लिखना होगा कि ‘2 साल से कम उम्र के बच्चों में इसका उपयोग न करें’। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू करने को कहा गया है ताकि किसी भी अनहोनी से बचा जा सके।

See also  कल ट्रैफिक जाम से बचना है तो रायपुरवासी फॉलो करें ये रुट मैप

प्रतिकूल प्रभाव को रोकने लिया गया यह फैसला

यह निर्णय वैश्विक स्तर पर बच्चों में कफ सिरप के प्रतिकूल प्रभावों की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए लिया गया है। स्वास्थ्य मंत्रालय के तहत गठित एक विशेषज्ञ समिति ने सुझाव दिया था कि 2 साल से कम उम्र के बच्चों में कफ सिरप का उपयोग उनके श्वसन तंत्र और मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल सकता है। कई मामलों में इन दवाओं के कारण बच्चों में गंभीर स्वास्थ्य जटिलताएं देखी गई थीं, जिसके बाद नियामक ने कड़ा रुख अपनाया है।

क्या है स्वास्थ्य विशेषज्ञों की राय ?

डॉक्टरों और बाल रोग विशेषज्ञों ने सरकार के इस कदम का स्वागत किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि छोटे बच्चों में सर्दी और खांसी अक्सर वायरल होती है, जो उचित देखभाल और घरेलू उपचार से ठीक हो सकती है। बिना डॉक्टरी सलाह के कफ सिरप देना बच्चों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। नई गाइडलाइंस के बाद अब फार्मासिस्ट और माता-पिता को भी दवाओं के चयन में अधिक सावधानी बरतनी होगी।गौरतलब है कि पिछले कुछ समय में भारतीय निर्मित कफ सिरप को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंताएं जताई गई थीं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी समय-समय पर छोटे बच्चों को बिना नियमन वाली दवाएं देने के खतरों के प्रति आगाह किया है। भारत सरकार का यह ताजा फैसला न केवल घरेलू स्तर पर स्वास्थ्य सुरक्षा मानकों को मजबूत करेगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारतीय फार्मा क्षेत्र की विश्वसनीयता भी बढ़ाएगा।

See also  मासूम बच्चों ने चीफ जस्टिस को बताई अपनी अंतर्व्यथा, कोर्ट ने कहा बच्चों को संप्रेक्षण गृह में ही रखा जाए, याचिकाकर्ता के पति ने ही लूटी थी अस्मत