Iran-US Ceasefire Talks: वाशिंगटन/तेहरान। मध्य पूर्व में युद्ध के बादल और गहरे हो गए हैं। इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच हुई 21 घंटे की लंबी मैराथन बैठक के बेनतीजा रहने के बाद, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आज 13 अप्रैल से Strait of Hormuz की पूर्ण नाकेबंदी शुरू करने का ऐलान किया है। हमेशा की तरह इस फैसले की जानकारी ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर दी है।

Iran-US Ceasefire Talks: China Threat US Over Blockade of Strait of Hormuz

Iran-US Ceasefire Talks: डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि होर्मुज और परमाणु मुद्दों पर ईरान के साथ सहमति नहीं बन पाई है। इस वजह से, यूनाइटेड स्टेट्स नेवी अब होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले या वहां प्रवेश करने वाले हर जहाज को रोकने (Block) की प्रक्रिया शुरू कर देगी। ट्रंप का आरोप है कि ईरान जहाजों से ‘अवैध टोल’ वसूल रहा है, जिसे उन्होंने वैश्विक स्तर पर ‘जबरदस्ती वसूली’ करार दिया है।

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Iran-US Ceasefire Talks: चीन ने जताया सख्त ऐतराज

अमेरिका के इस कदम पर चीन ने सख्त ऐतराज जताया है। चीन के रक्षा मंत्री एडमिरल डोंग जून ने कहा कि बीजिंग मध्य पूर्व की स्थिति पर करीबी नजर रख रहा है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि ईरान के साथ हमारे गहरे व्यापारिक और ऊर्जा समझौते हैं और हम उनका सम्मान करेंगे।

Iran-US Ceasefire Talks: चीन ने दो टूक चेतावनी दी कि उनके जहाज होर्मुज स्ट्रेट में लगातार आवाजाही कर रहे हैं और वे किसी भी बाहरी शक्ति को अपने मामलों में दखल देने की अनुमति नहीं देंगे। चीन के अनुसार, ईरान होर्मुज स्ट्रेट को नियंत्रित करता है और यह मार्ग उनके लिए खुला है।

Iran-US Ceasefire Talks: ईरान को हथियार आपूर्ति के दावों का खंडन

तनाव के बीच, चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने उन मीडिया रिपोर्ट्स को पूरी तरह से निराधार बताया है जिनमें दावा किया गया था कि चीन ईरान को हथियारों की आपूर्ति कर रहा है। बीजिंग का कहना है कि वे सैन्य निर्यात को लेकर अंतरराष्ट्रीय नियमों का सख्ती से पालन करते हैं और उन पर लगाए गए दोहरे उपयोग वाली तकनीक के आरोप बेबुनियाद हैं।

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Iran-US Ceasefire Talks: दुनिया भर के शेयर बाजारों पर प्रभाव

होर्मुज स्ट्रेट की नाकेबंदी की खबरों का सीधा असर दुनिया भर के शेयर बाजारों पर देखा गया है। भारत में भी सेंसेक्स 1600 अंकों से ज्यादा लुढ़क गया। चूंकि दुनिया का एक बड़ा हिस्सा कच्चे तेल और एलपीजी की आपूर्ति के लिए इसी मार्ग पर निर्भर है इसलिए इस नाकेबंदी से भारत जैसे देशों की एनर्जी सप्लाई पर गहरा संकट मंडरा सकता है।