टीआरपी। संसद के विशेष सत्र के दौरान संविधान संशोधन विधेयकों पर चर्चा के बीच गृह मंत्री अमित शाह ने परिसीमन और महिला आरक्षण को लेकर सरकार का पक्ष मजबूती से रखा। शाह ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि देश की 127 सीटें ऐसी हैं जहां मतदाताओं की संख्या 20 लाख के पार पहुंच गई है, जिससे एक सांसद के लिए अपने क्षेत्र की जनता की समस्याओं को संभालना मुश्किल हो रहा है।
यह चर्चा छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों के लिए भी बेहद अहम है, क्योंकि परिसीमन के बाद यहां की लोकसभा और विधानसभा सीटों की संख्या में बढ़ोतरी होने की संभावना है। सीटों के बढ़ने से क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व मजबूत होगा और विकास योजनाओं का क्रियान्वयन बेहतर तरीके से हो सकेगा।
’71 से फ्रीज हैं सीटें, अब सुधार जरूरी’ – शाह
लोकसभा में चर्चा का जवाब देते हुए अमित शाह ने कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि 1971 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने सीटों की संख्या को फ्रीज कर दिया था, जो तब से अब तक यथावत है। शाह ने सवाल उठाया कि जब किसी सीट पर 39 लाख वोटर हों और किसी पर मात्र 7 लाख, तो इस असंतुलन को दूर किए बिना लोकतांत्रिक न्याय कैसे संभव है?
गृह मंत्री ने महिला आरक्षण बिल (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) पर विपक्ष के “किंतु-परंतु” वाले रुख की आलोचना की। उन्होंने स्पष्ट किया कि मोदी सरकार यह संवैधानिक सुधार केवल महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए लाई है और जो लोग परिसीमन का विरोध कर रहे हैं, वे असल में SC और ST सीटों के आरक्षण के वैज्ञानिक आधार का विरोध कर रहे हैं।
इंडी गठबंधन के रुख पर उठाए सवाल
अमित शाह ने कहा कि विपक्षी गठबंधन के सदस्यों ने ऊपर से तो बिल का समर्थन किया, लेकिन बारीकी से देखें तो उनके तर्कों में विरोध की बू आती है। उन्होंने सदन को बताया कि यह विधेयक देश की आधी आबादी को उनका हक दिलाने और चुनावी विसंगतियों को दूर करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
देश में 127 लोकसभा सीटें ऐसी हैं जहां मतदाताओं की संख्या 20 लाख से अधिक हो चुकी है।
वर्तमान में सीटों का आवंटन 1971 की जनगणना के आधार पर ही चल रहा है।
माना जा रहा है कि विपक्ष जातिगत जनगणना और परिसीमन की टाइमलाइन को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश करेगा। चर्चा के बाद इन विधेयकों पर वोटिंग की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।


