अंबिकापुर। शहर के निजी विद्यालय स्वरंग किड्स एकेडमी में सरगुजिहा बोलने पर बच्चे को एडमिशन देने से मना कर दिया गया था। इस मामले में NSUI के विरोध प्रदर्शन के बाद डीईओ ने इस स्कूल का संचालन बंद करने का आदेश जारी कर दिया है। इसके साथ ही स्कूल पर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। बताया जा रहा है कि स्कूल को बगैर मान्यता के ही चलाया जा रहा था।
सरगुजा में छात्र संगठन NSUI की इकाई ने जिला शिक्षा अधिकारी से मुलाकात कर शिकायत की थी कि उत्तर छत्तीसगढ़ के सरगुजा में प्री-प्राइमरी स्कूल स्वरंग किड्स एकेडमी में एक बच्चे को इसलिए एडमिशन नहीं मिला, क्योंकि वह स्थानीय सरगुजिहा बोली बोलता है। स्कूल प्रबंधन ने कहा, स्कूल में बड़े घर के बच्चे पढ़ते हैं। वे आपके बच्चे की भाषा सीख जाएंगे, इसलिए एडमिशन नहीं दे सकते।
यह मामला जब मीडिया की सुर्खियां बना तब स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने इसे संज्ञान में लेते हुए जांच का निर्देश दिया। इस पर अमल करते हुए प्राचार्य रूमी घोष की अध्यक्षता में एक जांच टीम गठित की गई। जब जांच टीम स्कूल पहुंची, तो पूछताछ में पता चला, स्वरंग किड्स अकादमी स्कूल (पेशागी एजुकेशन सोसायटी) बिना मान्यता के ही संचालित हो रही थी। कारण बताओं नोटिस के जवाब में स्कूल की तरफ से इस बात को स्वीकार किया गया है, बगैर मान्यता के स्कूल का संचालन किया जा रहा था।
परिजनों की शिकायत के बाद सिंहदेव ने जताई नाराजगी
बच्चे के परिजन ने इसकी शिकायत कलेक्टर अजीत वसंत और पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव से की। सिंहदेव ने कहा, यदि सरगुजिहा बोलने से स्कूल में एडमिशन नहीं मिला तो ऐसे स्कूल को बंद कर देना चाहिए। उनके निर्देश पर ही NSUI ने विरोध प्रदर्शन किया और स्कूल का पंजीयन रद्द करने की मांग की।
प्रबंधन के रवैए से निराश हुए परिजन
राजकुमार यादव अपने बेटे सत्यम का एडमिशन कराने चोपड़ापारा के प्री प्राइमरी स्कूल स्वरंग किड्स एकेडमी गए गए थे। एडमिशन से पहले स्कूल के प्रिंसिपल और टीचर्स ने बच्चे से कुछ सवाल पूछे तो उसने सरगुजिहा बोली में जवाब दिया। स्कूल ने यह कहते हुए बच्चे का नर्सरी सेक्शन में एडमिशन लेने से इनकार कर दिया, यहां बड़े घरों के बच्चे पढ़ते हैं। वे आपके बच्चे की भाषा सीख जाएंगे।
राजकुमार यादव ने बताया, घर में सभी लोग सरगुजिहा बोली में ही बात करते हैं। इस कारण बेटा सत्यम सिर्फ सरगुजिहा बोली जानता है। उसे उम्मीद थी, स्कूल में एडमिशन मिलने पर वह हिंदी सीख जाएगा। शुक्रवार को उन्होंने इसकी शिकायत कलेक्टर अजीत वसंत और टीएस सिंहदेव से की।
NSUI ने की पंजीयन रद्द करने की मांग
इस मामले में NSUI ने सरगुजा कलेक्टर को ज्ञापन सौंपाकर स्कूल का पंजीयन रद्द करने की मांग की थी। NSUI ने कहा, यह स्थानीय बोली का अपमान है। बहरहाल DEO द्वारा इस मामले में बड़ी कार्रवाई की गई है, वहीं पीड़ित राजकुमार के बच्चे को आदित्येश्वर शरण सिंहदेव की पहल पर संबंधित बच्चे को शहर के बचपन प्ले स्कूल में नि:शुल्क प्रवेश दिलाया गया है।


